सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जता दी है, जिसमें फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को किसानों के पराली जलाने से जोड़ने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की मांग है कि एमएसपी का एक हिस्सा रोक लिया जाए और उसे बाद में उस किसान के पराली नहीं जलाने का सत्यापन होने पर रिलीज कर दिया जाए।
पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तारीख तय की है। इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एमएसपी के साथ छेड़छाड़ किसानों के हित में नहीं होगी। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करेगी।
इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि उन्होंने इस मामले में एक अन्य याचिका दाखिल की है। उन्होंने सुझाव दिया कि एमएसपी के एक हिस्से को इस बात के सत्यापन के लिए रोक लिया जाए कि किसान पराली जलाने में शामिल नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह सुझाव एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर आधारित है। दीवान ने पराली जलाने के संबंध में जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की नकल लागू करने का सुझाव भी दिया। किसान यूनियन की तरफ से पेश एडवोकेट चरनपाल सिंह ने कहा कि वे एमएसपी रोकने के सुझाव का विरोध करेंगे।