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पदोन्नति में भेदभाव: महिला सैन्य अफसरों की अर्जी पर रक्षा मंत्रालय को चेतावनी, कहा- चीजें व्यवस्थित करें

Sat, 08 Apr 2023 05:51 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली।

सार

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें भारतीय सेना द्वारा पदोन्नति पर विचार करते समय मनमानी और भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाने का आरोप लगाया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने उन महिला सैन्य अधिकारियों के लिए रैंक पदोन्नति में भेदभाव के आरोपों पर रक्षा मंत्रालय की खिंचाई की, जिन्हे शीर्ष अदालत के फैसले के बाद स्थायी कमीशन दिया गया था।  शीर्ष अदालत ने रक्षा मंत्रालय को अपना ‘घर’ व्यवस्थित करने अन्यथा अवमानना की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा।

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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें भारतीय सेना द्वारा पदोन्नति पर विचार करते समय मनमानी और भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाने का आरोप लगाया गया था। ये आवेदन लेफ्टिनेंट कर्नल नीतिशा बनाम भारत संघ के मामले में दायर किए गए थे, जिसमें शीर्ष अदालत ने मार्च, 2021 में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के मानदंड को मान्यता दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी मोहना ने कहा, हमें इस अदालत में आने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने 2011 में हमारी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) रोक दी क्योंकि मेरे पुरुष समकक्षों के एसीआर पर 2012 में विचार होना था। अब 2023 है। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के हलफनामे पर गौर करने के बाद चीफ जस्टिस ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा, ‘आपने अब तक क्या किया है? यह हलफनामा कुछ नहीं कहता।’ पीठ ने पूछा, क्या यह सच है कि आपने 2011 के बाद उनके एसीआर पर विचार नहीं किया है? क्या आपने हाल के एसीआर पर विचार किया है? वी मोहना ने कहा, मंत्रालय ने कुछ नहीं किया...।
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इन्होंने यह तक नहीं कहा कि किस साल के एसीआर पर विचार किया गया। मेरे पुरुष समकक्ष का 2011 तक के एसीआर पर विचार किया गया। मेरा मामला 2023 में लिया गया। इस पर चीफ जस्टिस ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन से एक के बाद एक कई सवाल पूछे। जवाब में नटराजन ने पुरुष समकक्ष के अनुरूप विचार की बात कही।

हमारे आदेश को दरकिनार करने का किया जा रहा है प्रयास
पीठ ने नटराज से कहा, ‘हम आपको नोटिस दे रहे हैं। अगर इसे नहीं सुधारा गया तो हम सख्ती से पेश आएंगे। क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे आदेश को दरकिनार करने का प्रयास किया गया है। अब हम इसे बहुत गंभीरता से लेंगे। आप उनके बाद के एसीआर को इस आधार पर नजरअंदाज नहीं कर सकते थे कि 2012 में उनके पुरुष समकक्षों पर विचार किया गया था। पीठ ने कहा, हमने अपने फैसले में विशेष रूप से कहा था कि उनकी अप-टू-डेट सर्विस प्रोफाइल पर विचार किया जाना चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि प्रमोशन के लिए हम अप-टू-डेट प्रोफाइल नहीं देखेंगे। आपको करना होगा। उनके द्वारा सेवा के दौरान बाद के अच्छे कार्यों को आप कैसे अनदेखा कर सकते हैं? इस बीच मोहना ने कहा कि यह दुर्भावनापूर्ण है। वे स्थायी कमीशन के लिए नवीनतम एसीआर पर विचार कर रहे हैं लेकिन पदोन्नति के मामले में नहीं।

हम आपको अंतिम अवसर दे रहे 
नटराज ने कहा, ‘अगर संभव हुआ तो हम निश्चित रूप से सुधार करेंगे।’ तब पीठ ने कहा कि अगले दिन अगर आप हमें कुछ और बताएंगे तो हमें अवमानना का नोटिस जारी करना होगा। हम आपको अपना घर व्यवस्थित करने का एक अंतिम अवसर दे रहे हैं।’ अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

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