फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: ‘घर संभालने का मूल्य नौकरी से हासिल वेतन से कम नहीं’, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात

Sun, 18 Feb 2024 06:43 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड में 2006 में हुए सड़क हादसे में मारी गई महिला के परिजनों को मिले मुआवजे का मामला सुन रही थी। जिस वाहन में हादसा हुआ, उसका बीमा नहीं था। लिहाजा महिला के परिवार को मुआवजे का दायित्व वाहन मालिक पर आया।

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

घर संभालने के काम का मूल्य ऑफिस में काम करने पर मिले वेतन के मूल्य से कमतर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसे में मारी गई एक महिला के गृहिणी होने की वजह से कम मुआवजा देने के मामले में यह बात कही। कोर्ट ने घर संभालने के काम को बहुमूल्य बताया। मुआवजा राशि ढाई लाख से बढ़ाकर 6 लाख करने के आदेश भी दिए।

जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि घर के काम संभाल रही महिला का स्तर उच्च दर्जे का होता है। उसके योगदान को पैसों के संदर्भ में आंकना मुश्किल है। फिर भी विभिन्न न्यायाधिकरणों और अदालतों को सड़क हादसे के दावों में घर संभालने के काम के लिए भी एक अनुमानित आय की गणना करनी चाहिए। परिवार में घर संभालने वाले सदस्य का वैसा ही अहम स्थान है, जैसा वेतन कमाने वाले सदस्य का। 

मामला 2006 में हुए हादसे का

विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड में 2006 में हुए सड़क हादसे में मारी गई महिला के परिजनों को मिले मुआवजे का मामला सुन रही थी। जिस वाहन में हादसा हुआ, उसका बीमा नहीं था। लिहाजा महिला के परिवार को मुआवजे का दायित्व वाहन मालिक पर आया। मोटर दुर्घटना दावा प्रतिकर न्यायाधिकरण ने उसके पति व बच्चे के लिए 2.5 लाख का मुआवजा निर्धारित किया। परिवार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपील की, जो 2017 में खारिज कर दी गई।

दिहाड़ी श्रमिक से भी कम कैसे आंकी आय
अपील की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में किसी की मौत का मुआवजा व्यक्ति की न्यूनतम अनुमानित आय और जीवन प्रत्याशा पर आधारित माना गया है। न्यायाधिकरण ने जो मुआवजा तय किया, वह दिहाड़ी श्रमिक की आय से भी कम बैठता है। हाईकोर्ट ने भी इसमें कोई कमी नहीं देखी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, घर के काम करने वाले की आय दिहाड़ी श्रमिक से भी कम कैसे मानी जा सकती है? ऐसा नजरिया स्वीकारा नहीं जा सकता। मुआवजा 6 लाख रुपये किया जाता है। यह 6 हफ्ते में चुकाना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें