यह पूरा विवाद यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। विधायक पर महिला के साथ बलात्कार, जबरन गर्भपात और डराने-धमकने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। केरल हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में राहुल मम्कूटथिल को इस आधार पर अग्रिम जमानत दी थी कि दोनों के बीच संबंध 'सहमति' वाले लग रहे थे। अब शीर्ष अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पलक्कड़ से विधायक राहुल मम्कूटथिल को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कांग्रेस नेता की अग्रिम जमानत को बरकरार रखा है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने पीड़िता की गरिमा और कानूनी प्रक्रिया की मर्यादा को सर्वोपरि बताया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने केरल हाईकोर्ट की ओर से पीड़िता के चरित्र पर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह से रिकॉर्ड से हटा दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। विधायक पर महिला के साथ बलात्कार, जबरन गर्भपात और डराने-धमकने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। केरल हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में राहुल मम्कूटथिल को इस आधार पर अग्रिम जमानत दी थी कि दोनों के बीच संबंध 'सहमति' वाले लग रहे थे। हाईकोर्ट ने कुछ ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिससे पीड़िता के पक्ष पर सवाल खड़े हो रहे थे। हाईकोर्ट ने व्हाट्सएप चैट्स और पीड़िता के विधायक के घर रुकने का भी जिक्र किया था। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की टिप्पणी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं इसे रिकॉर्ड से भी हटा दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस
पीड़िता ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने दलील दी कि जमानत देते समय अदालत को केस की मेरिट या पीड़िता के चरित्र पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। इससे भविष्य में चलने वाले ट्रायल पर बुरा असर पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत की सुनवाई के दौरान 'मिनी-ट्रायल' नहीं होना चाहिए। जस्टिस सुंदरेश की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की रिश्ते को आपसी सहमति से बताने वाली टिप्पणी अनावश्यक थीं। अदालत ने आदेश दिया कि इन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाए, जिससे निचली अदालत में निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाने से शीर्ष अदालत का इनकार
हालांकि शीर्ष अदालत ने राहुल मम्कूटथिल की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जमानत रद्द करने का कोई ठोस आधार नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी को आरोपों से क्लीन चिट मिल गई है। अब इस मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में चलेगी।