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Supreme Court: एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या करने वाले दोषियों की सजा बरकरार, कोर्ट ने नहीं मिली राहत

Wed, 15 Feb 2023 05:20 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गाजियाबाद के मुरादनगर में 2007 में एक व्यक्ति, उसकी पत्नी, उसके बेटे और दामाद की उनके घर पर हत्या कर दी गई थी। सभी की गर्दन को धारदार हथियार से काटा गया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के एक हत्या मामले में दोषियों की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी मामले में दोषसिद्धि के लिए गवाहों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता मायने रखती है। दरअसल, कोर्ट 2007 में उत्तर प्रदेश में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या मामले में सुनवाई कर रहा था, जिसमें तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

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इस मामले में चार दोषियों ने 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। दरअसल, हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोषियों में एक अजय की मृत्यु हो चुकी है। 

मृतक की बेटी ने दी थी गवाई 
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि संबंधित मामले में मृतक में से एक की दो बेटियों ने हमलावरों को हत्या करते देखा था। उनमें से एक को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश किया गया था। कोर्ट ने कहा, मृतक की बेटी भी घटना में घायल हो गई थी, उसे जानलेवा चोटें आईं थीं और वह पूरी तरह विश्वसनीय गवाह थी। 
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गाजियाबाद के मुरादनगर में हुई थी हत्या 
मामले के तहत गाजियाबाद के मुरादनगर में एक व्यक्ति, उसकी पत्नी, उसके बेटे और दामाद की उनके घर पर हत्या कर दी गई थी। सभी की गर्दन को धारदार हथियार से काटा गया गया था। पुलिस ने कहा था कि मृतक की एक बेटी भी वहां घायल हालत में मिली थी, उसने मुकेश, ब्रज पाल सिंह, रवि और अजय को तलवार और अन्य हथियारों से उसके माता-पिता पर हमला करते देखा था।

मासिक धर्म अवकाश के लिए नियम बनाने संबंधी याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दौरान अवकाश देने संबंधी नियम बनाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने के लिए बुधवार को सहमत हो गया। कोर्ट ने कहा कि इसे 24 फरवरी को सूचीबद्ध किया जाए। याचिका में सभी राज्यों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। दिल्ली के शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने याचिका दायर की है। उन्होंने केंद्र और सभी राज्यों को मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 14 का अनुपालन करने के लिए निर्देश देने की मांग की है।

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