उच्चतम न्यायालय ने पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी के निर्णय को बरकरार रखा है। उन्होंने विधानसभा में तीन विधायकों को मनोनीत किया था। इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा- 'उपराज्यपाल के पास मनोनीत करने का अधिकार है।' कांग्रेस ने उपराज्यपाल के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि उपराज्यपाल को विधायक मनोनीत करने से पहले सत्ताधारी पार्टी के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था।
यह मामला 2017 का है। जब किरण बेदी ने भाजपा से जुड़े तीन लोगों को विधानसभा मे विधायक के तौर पर मनोनीत किया था। इसकी वजह से वह कांग्रेस की वी नारायणसामी की सरकार के साथ टकराव की स्थिति में आ गई थी। उनके इस फैसले के खिलाफ सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी मद्रास उच्च न्यायालय चली गई थी। पार्टी ने उपराज्यपाल पर चुनी हुई सरकार की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने बेदी के इस फैसले को अवैध बताया था।
बेदी का कहना था कि यह नामांकन केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम के तहत पूरी तरह से वैध हैं। मनोनीत विधायकों के नाम- वी स्वामीनाथन, केजी शंकर और एस सेल्वागणपति हैं। मद्रास उच्च न्यायालय ने उपराज्यपाल के फैसले को सही ठहराया था। जिसके बाद इस मामले को कांग्रेस उच्चतम न्यायालय लेकर गई। शुरुआती सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया था और सभी विधायकों को विधानसभा जाने की इजाजत दी थी।
15 नवंबर को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी संघ की संपत्ति हैं और केंद्र को कांग्रेस सरकार से पुडुचेरी विधानसभा में विधायक मनोनीत करने के लिए परमार्श लेने की जरूरत नहीं है। उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति एके सीकरी के नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।