केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विभिन्न ट्रिब्यूनल के 248 सदस्यों को ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, 2026 के तहत कार्यकाल बढ़ाने के लिए योग्य पाया गया है। इन सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने कहा कि योग्य ट्रिब्यूनल सदस्य नए कानून के तहत तय पांच साल का कार्यकाल पूरा होने या लागू अधिकतम आयु सीमा तक पहुंचने तक अपने पद पर बने रहेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के तीन सदस्यों के मंगलवार को पद छोड़ने की जानकारी पर संज्ञान लिया। इनमें दो न्यायिक और एक तकनीकी सदस्य हैं। पीठ ने कहा कि इससे एनजीटी के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
पीठ ने अंतरिम उपाय के तौर पर एनजीटी के तीनों सदस्यों का कार्यकाल उनके पदों पर नई नियुक्तियां होने तक बढ़ा दिया। पीठ ने कहा, "हमने एनजीटी के तीन सदस्यों के संबंध में सुनवाई की है, जिनका कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। हालांकि, उम्र संबंधी सीमा के कारण ये सदस्य आगे कार्यकाल बढ़ाने के हकदार नहीं हो सकते हैं। लेकिन अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि नए सदस्यों की नियुक्ति की चयन प्रक्रिया बहुत जल्द पूरी कर ली जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि एनजीटी का रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित न हो, हम निर्देश देते हैं कि तीनों सदस्य अंतरिम उपाय के तौर पर अपने पदों पर तब तक बने रहें, जब तक उनके स्थान पर नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं।" अन्य ट्रिब्यूनल के संबंध में पीठ ने केंद्र से कहा कि 2026 के अधिनियम के अनुसार सदस्यों की नियुक्ति का मुद्दा बिना किसी देरी के उठाया जाए।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि नए कानून की धारा 24 के तहत विभिन्न ट्रिब्यूनल के 248 सदस्यों को कार्यकाल बढ़ाने के लिए योग्य पाया गया है। उन्होंने बताया कि इनमें से 229 सदस्यों के कार्यकाल बढ़ाने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जबकि बाकी 19 सदस्यों के संबंध में आदेश मंगलवार को जारी किए जा रहे हैं।
पीठ ने दर्ज किया कि योग्य सदस्य नए कानून के तहत तय पांच साल का कार्यकाल पूरा होने या लागू अधिकतम आयु सीमा तक पहुंचने तक पद पर बने रहेंगे। पीठ ने कहा, "इसे देखते हुए भारत सरकार की ओर से इन दो शर्तों के अधीन कार्यकाल बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी किया जाए।"
यह मामला 19 मई के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद सामने आया था, जिसमें उन ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों, चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ा दिया गया था, जिनका कार्यकाल इस तारीख से पहले समाप्त होने वाला था। इसका उद्देश्य ट्रिब्यूनल के कामकाज में किसी तरह की बाधा को रोकना था।