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SC Updates: CJI ने हाईकोर्ट में भी ऑनलाइन सुनवाई की अपील की; DERC में नियमित नियुक्तियों पर दिल्ली से जवाब तलब

Mon, 18 May 2026 09:37 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने पुजारियों को 'कर्मचारी' मानकर न्यूनतम वेतन देने की मांग की है। इसमें काशी विश्वनाथ और मदुरै मंदिर समेत आंध्र-तेलंगाना के उदाहरण दिए गए हैं, जहां पुजारियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें सरकार-नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों, सेवादारों और मंदिर कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और अन्य लाभों की समीक्षा के लिए एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर इस जनहित पीआईएल पर सुनवाई कर सकती है।
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याचिकाकर्ता चाहते हैं कि पुजारियों-मंदिर कर्मचारियों को वेतन संहिता, 2019 की धारा 2(के) के तहत कर्मचारी माना जाए। याचिका में तर्क दिया गया है कि जब राज्य किसी मंदिर का प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता है, तो वहां मालिक और कर्मचारी का रिश्ता बन जाता है। ऐसे में पुजारियों को सम्मानजनक वेतन न देना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि मामले की शुरुआत 4 अप्रैल को हुई। उस दिन वह वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां पूजा करने के बाद उन्हें पता चला कि सरकारी नियंत्रण वाले इस मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है।

याचिका में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का भी जिक्र किया गया है। वहां हाल ही में पुजारियों और कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। याचिका के अनुसार, इन लोगों को अकुशल या अर्ध-कुशल मजदूरों के लिए तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। इसे एक तरह का शोषण बताया गया है। राज्य एक आदर्श नियोक्ता के रूप में काम करने के बजाय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम और नीति निर्देशक सिद्धांतों (अनुच्छेद 43) का उल्लंघन कर रहा है। याचिका में 7 फरवरी 2025 की एक घटना का भी जिक्र है। उस दिन मदुरै के दंडायुथपाणि स्वामी मंदिर में एक सर्कुलर जारी कर पुजारियों को आरती की थाली में दक्षिणा लेने से मना कर दिया गया था। हालांकि विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया, लेकिन इससे पुजारियों के सामने भुखमरी का खतरा पैदा हो गया था।
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CJI ने हाईकोर्ट में भी ऑनलाइन सुनवाई की अपील की
नई दिल्ली में सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने देश के सभी हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों से फिलहाल सोमवार और शुक्रवार को वर्चुअल सुनवाई करने का आग्रह किया है। यह फैसला पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ते खर्च और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का निर्णय लिया था।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने ऑनलाइन सुनवाई की तारीफ करते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल बेहद सुचारु रहा और जजों ने काफी धैर्य दिखाया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस फैसले का समर्थन किया। CJI ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को ही सभी हाईकोर्टों से इसी व्यवस्था को अपनाने का अनुरोध किया था। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद उठाया गया, जिसमें अनावश्यक खर्च कम करने पर जोर दिया गया था।

गुजरात के चिड़ियाघरों में भैंसों के वध पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के दो चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों को खिलाने के लिए भैंसों के वध के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह वध किसी व्यावसायिक या निजी लाभ के लिए नहीं किया जा रहा है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। मामला गुजरात के सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क से जुड़ा था।

एनजीओ ‘एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन’ ने अदालत में कहा था कि चिड़ियाघर परिसर के अंदर पशुओं का वध करना कानून के तहत नियंत्रित होना चाहिए और इसके लिए लाइसेंस जरूरी है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इससे प्रदूषण और स्वच्छता से जुड़े सवाल भी खड़े होते हैं। हालांकि न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि ये नियम मुख्य रूप से मानव उपभोग और व्यावसायिक वध के लिए बने हैं। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।
 

बार काउंसिल चुनाव विवाद सुलझाने के लिए दो नए ट्रिब्यूनल बनेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए दो नए चुनाव ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इन ट्रिब्यूनलों की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज दीपक गुप्ता और हिमा कोहली करेंगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दोनों पूर्व जजों की सहमति लेकर ट्रिब्यूनल गठित करने को कहा। अदालत ने कहा कि बार चुनावों को लेकर लगातार बढ़ रहे विवादों को देखते हुए यह कदम जरूरी है। सुनवाई के दौरान राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट पहले ही महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण का आदेश दे चुका है। अदालत ने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर ‘को-ऑप्शन’ के जरिए महिलाओं को सीटें दी जा सकती हैं।
 

DERC में नियमित नियुक्तियों पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार से पूछा कि दिल्ली विद्युत नियामक आयोग यानी दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन में नियमित नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं। अदालत ने इस मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

एनजीओ ‘एनर्जी वॉचडॉग’ ने याचिका दाखिल कर कहा कि आयोग में फिलहाल केवल दो अस्थायी सदस्य हैं और न तो स्थायी अध्यक्ष है और न ही कोई न्यायिक सदस्य। याचिका में कहा गया कि इससे बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। अदालत को बताया गया कि अगस्त 2025 में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द नियुक्तियां करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।
 

हैदराबाद के KBR नेशनल पार्क के आसपास पेड़ कटाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केबीआर नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि पार्क के चारों ओर 25 से 35 मीटर के दायरे में कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता काजल महेश्वरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना सरकार ने पार्क के इको-सेंसिटिव जोन को घटाकर कुछ जगहों पर केवल 3 मीटर तक कर दिया है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होगा। राज्य सरकार यहां फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण परियोजना चला रही है, जिसके लिए 1300 से ज्यादा पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां शामिल थे, ने केंद्र और तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
 

सुप्रीम कोर्ट ने डीएमएफ फंड 'घोटाला' मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में कथित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने टुटेजा को राहत देते हुए कहा कि वह अप्रैल 2024 से हिरासत में हैं और मुकदमे में काफी समय लगने की संभावना है। इस बात पर गौर करते हुए कि 85 गवाहों से पूछताछ किए जाने का प्रस्ताव है, शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे के पूरा होने में समय लगेगा और इसी तरह की स्थिति वाले सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह सच है कि याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन यह मुकदमे का विषय होगा। हम मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करना उचित समझते हैं। शीर्ष अदालत को बताया गया कि टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह अन्य मामलों के सिलसिले में 21 अप्रैल, 2024 से ही हिरासत में थे। राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाईं और टुटेजा को निर्देश दिया कि वह छत्तीसगढ़ से बाहर रहें और रिहाई के एक सप्ताह के भीतर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और संबंधित पुलिस स्टेशन को अपने रहने की जगह का विवरण और संपर्क नंबर दें। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि वह सुनवाई की हर तारीख पर निचली अदालत में पेश हों, जब तक कि उन्हें छूट न दी गई हो, और वह गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें।
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बार काउंसिल चुनाव विवाद निपटारे के लिए दो नए ट्रिब्यूनल बनाए
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए दो नए चुनाव ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश दिया। इन ट्रिब्यूनलों की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हिमा कोहली करेंगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को निर्देश दिया कि वह दोनों पूर्व जजों की औपचारिक सहमति प्राप्त कर ट्रिब्यूनलों का गठन करे। अदालत ने कहा कि विभिन्न राज्यों में बार काउंसिल चुनावों को लेकर बढ़ते मुकदमों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी सभी शिकायतों का निपटारा अब इन ट्रिब्यूनलों के जरिये किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी उठा। विवाद का मुख्य कारण ‘सह विकल्प’ व्यवस्था है, जिसके तहत यदि पर्याप्त संख्या में महिला उम्मीदवार निर्वाचित नहीं होती हैं, तो महिलाओं के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत सीटें नामित की जा सकती हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकार प्राप्त निर्वाचन निगरानी समिति को यह तय करने की जिम्मेदारी थी कि महिलाओं के सह विकल्प की प्रक्रिया किस तरह लागू होगी, ताकि इसका दुरुपयोग न हो। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में राज्य बार काउंसिलों में महिला वकीलों के लिए 30 फीसदी आरक्षण का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर 10 फीसदी सीटें सह विकल्प के जरिये भरी जा सकती हैं। बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए अदालत पहले ही जस्टिस सुधांशु धूलिया, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रविशंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि की समिति गठित कर चुकी है।

खनिज निधि भ्रष्टाचार मामले में पूर्व आईएएस अफसर टुटेजा को जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जिला खनिज निधि (डीएमएफ) में अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में जमानत दे दी। अदालत ने माना कि मामले की सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लग सकता है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि टुटेजा 24 जनवरी 2024 से विभिन्न भ्रष्टाचार मामलों में जेल में हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने अदालत को बताया कि डीएमएफ मामले में उन्हें 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने कहा कि सह-आरोपी पहले ही जमानत पा चुके हैं। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन उनकी सत्यता का फैसला ट्रायल के दौरान होगा। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए टुटेजा पर सख्त शर्तें लगाईं। अदालत ने निर्देश दिया कि वह छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे। पूर्व आईएएस टुटेजा पर आरोप है कि उद्योग विभाग में संयुक्त निदेशक रहते हुए उन्होंने डीएमएफ के तहत ठेकों के आवंटन में भारी रिश्वत ली। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्हें छह अन्य भ्रष्टाचार मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है और अब यही अंतिम मामला बचा है। सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।

पीएम मोदी, केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बन ठगी करने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने उस आरोपी को जमानत दे दी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बनकर लोगों से उगाही करने का आरोप है। आरोपी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 5 फरवरी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मोहम्मद काशिफ की जमानत याचिका खारिज की गई थी। काशिफ करीब तीन साल से हिरासत में है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी कि वह भविष्य में किसी भी सांविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का नाम इस्तेमाल नहीं करेगा। अदालत ने उसे जांच और ट्रायल में सहयोग करने का निर्देश भी दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी सहयोग नहीं करता है तो  ईडी उसकी जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकता है। ईडी ने 19 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया था। एजेंसी के मुताबिक, काशिफ खुद को प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर सरकारी विभागों में काम कराने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलता था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ मॉर्फ्ड और फोटोशॉप्ड तस्वीरें पोस्ट कर लोगों को प्रभावित करता था।

वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के साथ कोर्ट में व्यक्तिगत भी हो सकते हैं पेश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जो वकील सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, वे अदालत में व्यक्तिगत रूप से भी पेश हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी एक सर्कुलर में कहा गया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से वकीलों को हो रही दिक्कतों को लेकर प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ था। सर्कुलर में कहा गया, पूर्व में जारी निर्देश राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए दिए गए थे। हालांकि, कोर्ट बार एसोसिएशन ने वकीलों को हो रही परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया है।

बांकेबिहारी मंदिर: समिति पर लगे आरोपों की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के मामलों की देखरेख कर रही उच्चाधिकार प्राप्त समिति पर लगे आरोपों की जांच की जाएगी। आरोपों को गंभीर बताते हुए शीर्ष अदालत ने समिति से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई तय की है। शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें मंदिर की पारंपरिक पूजा व्यवस्था और दर्शन समय में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मंदिर में वर्षों से गर्मी और सर्दी के अनुसार अलग-अलग दर्शन समय तय होते रहे हैं। यह व्यवस्था भगवान के जागने और विश्राम की धार्मिक परंपरा से जुड़ी हुई है। आरोप है कि 2025 में जारी आदेशों के जरिये इस समय में बदलाव कर दिया गया। इससे परंपराएं प्रभावित हुई हैं।
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