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Supreme Court: केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी को बड़ी राहत, विरोधी पक्ष को थमाया नोटिस, क्या है मामला?

Mon, 27 Jul 2026 04:24 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है। केरल हाईकोर्ट ने सुरेश गोपी के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करने से इनकार कर दिया था। अब इस पूरे कानूनी विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट में होगा।
 
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केरल के त्रिशूर से भाजपा के इकलौते सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी एक विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए विरोधी पक्ष को नोटिस जारी किया है। यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। त्रिशूर से मिली ऐतिहासिक जीत को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे विवाद की सुनवाई करेगा।
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हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना गया था। हाईकोर्ट ने सुरेश गोपी की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने याचिका को शुरुआती स्तर पर ही रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट का मानना था कि लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और ट्रायल जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेता बिनॉय एएस को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।

चुनावी धांधली और गंभीर आरोपों का पूरा मामला
त्रिशूर के स्थानीय नेता बिनॉय एएस ने चुनाव परिणाम के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने सुरेश गोपी पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि प्रचार के दौरान धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, वोटरों को लुभाने के लिए मोबाइल फोन जैसे उपहार देने का वादा किया गया। याचिका में यह दावा भी किया गया है कि सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो मौजूद हैं, जिनमें सुरेश गोपी मतदाताओं को पैसों का लालच देते दिख रहे हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर चुनाव रद्द करने की मांग की गई है।
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त्रिशूर से रचा था चुनावी इतिहास
सुरेश गोपी की यह जीत भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद खास है। उन्होंने त्रिशूर लोकसभा सीट से 74,686 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। इस जीत के साथ ही उन्होंने केरल में भाजपा का सात दशकों का सूखा खत्म कर दिया। वह फिलहाल केंद्र सरकार में पर्यटन और पेट्रोलियम राज्य मंत्री का पद संभाल रहे हैं।

1993 मुंबई धमाकों के दोषी अबू सालेम की रिहाई याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सालेम की तुरंत रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सालेम ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वह पुर्तगाल से अपने प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत भारत में 25 साल की जेल की सजा पूरी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट ने उसकी रिहाई की मांग को समय से पहले बताते हुए खारिज कर दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जब पूछा कि सालेम ने 25 साल की सजा कैसे पूरी कर ली, तो उनके वकील ने तर्क दिया कि सालेम ने विचाराधीन कैदी के रूप में बिताए गए समय, सजा काटने के समय और जेल में अच्छे आचरण के बदले मिली छूट को मिलाकर 25 साल पूरे कर लिए हैं। सालेम के वकील ने कोर्ट से इस मुद्दे पर विस्तृत फैसला सुनाने का अनुरोध किया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया।

गौरतलब है कि सालेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और उसकी सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि सजा में छूट (रेमिशन) का लाभ उठाकर 25 साल की सीमा को कम नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के मुताबिक सालेम की 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। वहीं, जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार पुर्तगाल को दिए अपने वचन को निभाने और 25 साल पूरे होने पर सालेम को रिहा करने के लिए बाध्य है।

रेव पार्टी मामले में कुल्लू के अधिकारियों को राहत, FIR और SIT जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने कुल्लू में 2025 में हुई रेव पार्टियों के मामले में वहां के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और विशेष जांच टीम गठित करने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

तबादले के आदेश बरकरार 
अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने अदालत में तर्क दिया कि आयोजकों के पास शराब का वैध लाइसेंस था और वहां से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बिना उनका पक्ष सुने स्थानांतरित कर दिया गया और उनके खिलाफ एफआईआर या एसआईटी जांच से उनकी साख पर दाग लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर और एसआईटी जांच के आदेश पर तो रोक लगा दी, लेकिन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों (डीसी, एसपी और एसडीएम) के तबादले के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अधिकारी अपने स्थानांतरण का विरोध नहीं कर सकते।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कुल्लू जिले के कसोल, जिभी और मनाली जैसे पर्यटन क्षेत्रों में कथित तौर पर आयोजित की जाने वाली रेव पार्टियों से जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 24 जून को प्रशासन और रेव पार्टी आयोजकों के बीच साठगांठ का कड़ा संज्ञान लेते हुए डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी जांच और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए थे। जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 में नियमों का उल्लंघन कर देर रात तक ऐसी पार्टियां आयोजित की गई थीं, जिसमें देश-विदेश से हजारों लोग शामिल हुए थे।
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'एक हफ्ते में फ्लैट का काम पूरा करके दें': सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पार्श्वनाथ डेवलेपर्स से जुड़ा है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के मामलों में पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों को उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और उनकी लंबित स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी को गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका प्रोजेक्ट में कैंसर पीड़ित रीता टिक्कू और लोकेश टिक्कू के बुक किए गए फ्लैट का काम एक हफ्ते में पूरा करने का आदेश दिया।

देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ टिक्कू दंपती की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी के वकील ने कोर्ट को बताया कि निर्देशानुसार उन्होंने ब्याज समेत पूरी राशि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर दी है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इमारत में बिजली आपूर्ति नहीं है। लिफ्ट काम नहीं कर रही।
पीठ ने कहा कि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो कंपनी के निदेशकों को जेल भेजा जाएगा। यूनिट का काम नवीनतम डिजाइन के अनुसार 31 अक्तूबर तक पूरा किया जाए।

यूनिटेक के निदेशकों जैसा होगा हश्र: सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले 20 जुलाई को पीठ ने कंपनी को एक हफ्ते में रजिस्ट्री में पूरी राशि जमा करने का अंतिम मौका दिया था। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं हुआ तो यूनिटेक के निदेशकों जैसा हश्र होगा। पीठ ने कहा कि वह अनुच्छेद-142 के तहत काम कर रही और आईबीसी या दिवालियापन की कार्यवाही से उसका कोई सरोकार नहीं है। कोर्ट ने 13 जुलाई को कंपनी और उसके निदेशकों के बैंक खाते सील किए थे और वरिष्ठ नागरिकों के संघर्ष को देखते हुए यह सख्त रुख अपनाया था। याचिकाकर्ताओं को 2006 में फ्लैट आवंटित हुए थे, लेकिन भुगतान के बावजूद उन्हें अब तक कब्जा नहीं मिला।
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