सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल के पूर्व मंत्री एंटनी राजू को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने 1990 के चर्चित अंडरवियर सबूत छेड़छाड़ मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि प्रभावी बनी रहेगी।
पूरा मामला क्या है?
इस फैसले के चलते एंटनी राजू की केरल विधानसभा सदस्यता पहले से ही समाप्त हो चुकी है। जनाधिपत्य केरल कांग्रेस के एकमात्र विधायक रहे राजू को अब कानूनी अयोग्यता का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला 1990 का है, जब ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एंड्रयू साल्वाटोर सेरवेली को तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर ड्रग्स की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि नशीला पदार्थ उसके अंडरगारमेंट में छिपाया गया था।
बाद में अदालत ने सबूतों पर सवाल उठाते हुए उसे बरी कर दिया, क्योंकि पेश किया गया कपड़ा उसके शरीर के आकार से मेल नहीं खाता था। विदेशी जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के बाद सबूतों में हेरफेर के आरोप सामने आए। इसके बाद 1994 में केस दर्ज हुआ और 2006 में चार्जशीट दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एंटनी राजू की कानूनी लड़ाई और मुश्किल हो गई है। अदालत ने पहले ही मामले में तेजी से सुनवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह फैसला आया।
लापता बच्चों की पहचान के लिए बायोमीट्रिक की मांग संवेदनशील मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने लापता और बचाए गए बच्चों की पहचान करने के लिए केंद्र और अन्य संस्थाओं को राष्ट्रीय डीएनए और बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका में उठाए गए मुद्दों को अत्यंत संवेदनशील बताया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से इस मुद्दे से निपटने के लिए समाधान सुझाने को कहा।
पीठ ने कहा, यह मुद्दा निश्चित रूप से अत्यंत संवेदनशील है, आप अपने कनिष्ठ वकीलों से थोड़ा शोध करने और हमें समाधान का ढांचा प्रस्तुत करने के लिए कहें। पीठ ने कहा, कृपया समाधान सुझाएं। सोचें कि कैसे एक सहयोगात्मक तंत्र स्थापित किया जा सकता है और कैसे विभिन्न संस्थानों को एक साझा मंच पर लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे लापता और बचाए गए बच्चों के लिए उचित वैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ एक राष्ट्रीय डीएनए और बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित करें, ताकि वैज्ञानिक मिलान और पहचान की बहाली संभव हो सके। याचिका में यह भी निर्देश देने की मांग की गई है कि सभी अज्ञात बचाए गए बच्चों और लापता बच्चों के इच्छुक जैविक माता-पिता या अभिभावकों के डीएनए नमूने, उचित सुरक्षा उपायों और सहमति प्रोटोकॉल के अधीन, पुनर्मिलन और पहचान की पुष्टि के सीमित उद्देश्य के लिए अनिवार्य रूप से लिए जाएं।