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Supreme Court: बिना ID के ही बदले जाएंगे 2000 रुपये के नोट, RBI के आदेश को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई नहीं

Mon, 10 Jul 2023 04:23 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अश्विनी उपाध्याय ने यह भी दावा किया कि बहुत कम समय में 2000 रुपये के नोटों के बदले बैंकों ने ग्राहकों को 50000 करोड़ रुपये के नोट लौटाए हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2000 के नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने दो हजार के नोटों को बिना किसी रिक्विजिशन स्लिप और आईडी प्रूफ के बदलने की अनुमति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।  बता दें 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर किया जा रहा है। इस याचिका को अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर किया था और उन्होंने  मामले में तत्काल सुनवाई की अपील की थी। हालांकि, कोर्ट ने इस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
इससे पहले कोर्ट ने बिना स्लिप और पहचान पत्र के 2000 रुपये के नोटों को बदलने की अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के मुद्दे पर अपनी रजिस्ट्री से रिपोर्ट भी मांगी थी। उल्लेखनीय है कि अश्विनी उपाध्याय ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील करते हुए कहा था कि अपराधी और आतंकवादी भी 2000 रुपये के नोट बिना किसी स्लिप और पहचान पत्र के बदल रहे हैं। 

30 सितंबर तक बदले जाएंगे 2000 के नोट
अश्विनी उपाध्याय ने यह भी दावा किया कि बहुत कम समय में 2000 रुपये के नोटों के बदले बैंकों ने ग्राहकों को 50000 करोड़ रुपये के नोट लौटाए हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2000 के नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी। लोग इन नोटों को 30 सितंबर तक बैंक अकाउंट में जमा कर सकते हैं या कम कीमत के नोट से बदल सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
आरोपियों की संपत्तियों को ध्वस्त करने के खिलाफ याचिकाओं पर सितंबर में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सितंबर में सुनवाई करेगा, जिनमें विभिन्न राज्य सरकारों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि दंगे और हिंसा के मामलों में आरोपियों की संपत्तियों को ध्वस्त न किया जाए। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने पीठ से कहा कि इस मुद्दे पर कानून को स्पष्ट किया जाना चाहिए क्योंकि अब कानून की परवाह किए बिना लोगों के घरों को तोड़ने का यह देश भर में चलन बन चुका है।
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