सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस्कॉन इंडिया की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी, जिसमें 16 मई के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। अदालत ने नोटिस जारी कर बेंगलुरु फेक्शन और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। इससे 25 साल पुराना विवाद दोबारा खुल गया है। इससे पहले दो जजों की बेंच इस मुद्दे पर विभाजित हो गई थी, जिसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश के पास गया और तीन जजों की नई बेंच बनी। इस्कॉन इंडिया ने अदालत में 6000 से अधिक पन्नों के साक्ष्य पेश किए, जिनमें फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप शामिल हैं। 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का 2011 का फैसला रद्द कर कहा था कि बेंगलुरु का मंदिर इस्कॉन बंगलूरू की स्वतंत्र संस्था का है।
कर्नाटक के पूर्व सांसद रेवन्ना की अपील पर जिरह; साल 2000 के दिल्ली दंगे पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट आज कई अहम मामलों की सुनवाई करेगी। इसमें सस्पेंडेड जेडी(एस) नेता प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म मामले में उनकी अपील पर विचार किया जाएगा। वहीं, 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट महिला नेवी अधिकारियों की याचिकाओं पर भी विचार करेगी, जिन्होंने स्थायी कमीशन न मिलने को चुनौती दी है। साथ ही, मुस्लिम महिलाओं की याचिकाओं पर सुनवाई होगी, जिन्होंने अपने पति द्वारा दिए गए तलाक-ए-हसन की वैधता को चुनौती दी है।
पूर्व सांसद की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सपा सांसद बाल कुमार पटेल की 2007 के आर्म्स लाइसेंस मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोहराया कि किसी भी राज्य सरकार को सांसद या पूर्व सांसद के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने से पहले संबंधित हाई कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि यूपी सरकार बिना हाई कोर्ट की मंजूरी के मामला वापस नहीं ले सकती थी। पटेल पर 2007 में लाइसेंस में अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने भी 2021 में मामले की वापसी से इनकार करते हुए हाई कोर्ट की मंजूरी आवश्यक बताई थी। हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद पटेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, पर शीर्ष अदालत ने भी अपील निरस्त कर दी।
पूर्व IAS अधिकारी की सुरक्षा याचिका पर केंद्र-सीबीआई-ईडी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व IAS अधिकारी अनिल तुतेजा की याचिका पर केंद्र, सीबीआई, ईडी और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। तुतेजा ने 11 FIRs में लगातार हो रही गिरफ्तारी और कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। याचिका में आरोप है कि कई एजेंसियां वेंडिक्टिव रणनीति के तहत बार-बार गिरफ्तारी कर रही हैं, जबकि समान आरोपों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। तुतेजा ने दावा किया कि वे 14 महीने से जेल में हैं और उनके खिलाफ overlapping आरोपों को आधार बनाकर हिरासत बढ़ाई जा रही है। याचिका में कहा गया है कि कई छापों के बावजूद अवैध संपत्ति कभी बरामद नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट अब सभी एजेंसियों का जवाब मिलने के बाद मामले पर आगे सुनवाई करेगा।