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Supreme Court: हरिद्वार के मंदिर में प्रशासक की नियुक्ति पर फैसला करेगा सुप्रीम कोर्ट, 19 अगस्त को सुनवाई

Sat, 16 Aug 2025 04:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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सुप्रीम कोर्ट 19 अगस्त को हरिद्वार स्थित मां चंडी देवी मंदिर के 'सेवायत' की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें बद्री केदार मंदिर समिति को मंदिर की देखरेख के लिए प्रशासक नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। 'सेवायत' का मतलब वह पुजारी होता है, जो मंदिर के रोजमर्रा के कामों और पूजा-पाठ में सक्रिय रूप से शामिल होता है।
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जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस वी एन भट्टी की बेंच ने 28 जुलाई को उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया था और दो हफ्तों में जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कहा था कि बद्री केदार मंदिर समिति की ओर से लिया गया कोई भी निर्णय इस याचिका के फैसले पर निर्भर करेगा।

महंत भवानी नंदन गिरी ने वकील अश्विनी दुबे के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना किसी सबूत या शिकायत के मंदिर का नियंत्रण एक समिति को दे दिया, जबकि साल 2012 में खुद हाईकोर्ट ने एक पैनल बनाया था, जिसमें हरिद्वार के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शामिल थे। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि प्रशासक नियुक्त करने का आदेश एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जो एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था।
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मां चंडी देवी मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य ने की थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पूर्वज तबसे ही इस मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि अब तक मंदिर की देखरेख करने वाले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पैनल ने कभी किसी प्रकार की गड़बड़ी, अव्यवस्था या पैसों के गलत इस्तेमाल की कोई शिकायत नहीं की है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट का आदेश मनमाना, अवैध और अन्यायपूर्ण है। कोर्ट ने सेवायत और मुख्य ट्रस्टी को बिना सुने आदेश दे दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हाईकोर्ट ने उन्हें कोई नोटिस नहीं भेजा और बिना कोई मौका दिए सीधे आदेश जारी कर दिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने गलत तरीके से मंदिर की जिम्मेदारी बद्री केदार मंदिर समिति को दी, जबकि पहले से ही जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पैनल ईमानदारी से काम कर रहा था। 

यह आदेश उस समय दिया गया, जब हाईकोर्ट एक महिला रीना बिष्ट की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। रीना ने दावा किया है कि वह मंदिर के मुख्य पुजारी रोहित गिरी की लिव-इन पार्टनर है।  रोहित गिरी की पत्नी गीतांजलि ने 21 मई को अपने पति, रीना बिष्ट और सात अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि 14 मई को रीना ने उनके बेटे को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की थी।
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उसी दिन, पंजाब पुलिस ने रोहित गिरी को एक अलग छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार कर लिया और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि रोहित गिरी, रीना बिष्ट के साथ रह रहे थे, जबकि उनका तलाक का मामला कोर्ट में लंबित था और जनवरी में रीना ने उनके बच्चे को जन्म दिया। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी भी की थी कि मंदिर के ट्रस्टी 'जहरीला माहौल' बना रहे हैं और ट्रस्ट में पूरी तरह अव्यवस्था है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बात को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता कि दान के पैसों में भी गड़बड़ी हो रही हो।

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