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SC: महाकुंभ में हुए हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका; वीआईपी मूवमेंट समेत इन मुद्दों को उठाया गया

Thu, 30 Jan 2025 10:49 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को 29 जनवरी को महाकुंभ के दौरान हुई घटना पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और लापरवाही बरतने वाले व्यक्तियों, अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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प्रयागराज महाकुंभ में हुए हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। अर्जी में याचिकाकर्ता ने मांग की है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दे। दरअसल, महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर दूसरे अमृत स्नान से ठीक पहले हादसा हुआ था। इसमें 30 लोगों की दुखद मौत हो गई थी।

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क्या है मामला?
दरअसल, महाकुंभ जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने के साथ नीति और नियमन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। एक वकील ने यह जनहित याचिका दायर की है। इसमें यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वीआईपी मूवमेंट से आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रभावित न हो, उनके लिए कोई खतरा पैदा न हो और महाकुंभ में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अधिकतम स्थान उपलब्ध कराया जाए।

लापरवाही बरतने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग
जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को 29 जनवरी को महाकुंभ के दौरान हुई घटना पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और लापरवाही बरतने वाले व्यक्तियों, अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
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जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन
इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ में मंगलवार देर रात हुए हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग से कराने का आदेश दिया था। साथ ही मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया गया है। घटना की जानकारी साझा करते हुए सीएम योगी भावुक भी हो गए थे।

भीड़ प्रबंधन की सख्त व्यवस्था की गई
हादसे के बाद पुलिस ने देर रात से ही मेले में जाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी थी। जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया और यातायात पुलिस ने सात आपातकालीन योजनाएं लागू कर भीड़ पर काबू पाया। इसके अनुसार ही श्रद्धालुओं को संगम की ओर जाने दिया गया। मेले के दौरान भीड़ प्रबंध को लेकर पुलिस ने 32 योजनाएं बनाई गईं। इसमें रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, शहर और सीमाओं पर आने-जाने वाली भीड़ को शामिल किया है।

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समन गलत बता सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनी के खिलाफ मामला किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने एक फार्मा कंपनी के खिलाफ घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं बनाने की कार्यवाही को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समन आदेश में नाममात्र का भी कोई कारण नहीं दिया गया था। जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा, समन आदेश पूरी तरह से बिना किसी कारण के था। यह फैसला फर्म और अन्य की ओर से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अक्तूबर 2023 के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आया। हाईकोर्ट ने कुरनूल ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। पीठ ने फार्मा कंपनी के वकील की दलीलों का हवाला देते हुए कहा, हालांकि, हम अपीलकर्ताओं की विभिन्न आधारों पर की गई दलीलों पर विचार करना आवश्यक नहीं समझते हैं, क्योंकि वर्तमान अपील इस आधार पर स्वीकार किए जाने योग्य है कि मजिस्ट्रेट ने बिना कोई कारण बताए प्रक्रिया जारी कर दी है। उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए पीठ ने जुलाई 2023 के ट्रायल कोर्ट के समन आदेश और संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया। 
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