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Supreme Court: यूक्रेन से लौटे छात्रों से लेकर EVM पर रोक वाली याचिका तक, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें

Mon, 05 Sep 2022 10:56 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया गया कि उन्हें इस मामले पर निर्देश लेने की जरूरत है। 
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूक्रेन से देश लौटे भारतीय छात्रों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। याचिका में इन छात्रों के द्वारा मेडिकल की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति मांगी गई है। कोर्ट ने मामले को 15 सितंबर के लिए सूचिबद्ध किया है। 
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बता दें कि रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। युद्ध के शुरू होने के बाद कई भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ा और भारत वापस लौटना पड़ा था। अब इन छात्रों की मांग है कि उनकी मेडिकल की पढ़ाई जारी रखा जाए। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। 

जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के यह कहने के बाद मामले को स्थगित कर दिया गया कि उन्हें इस मामले पर निर्देश लेने की जरूरत है। 
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वकील एश्वर्या सिन्हा के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि करीब 14,000 भारतीय छात्रों की शिक्षा पूरी तरह से बंद हो गई है। उनके करियर को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया गया है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार भ्रामक हो गए हैं। 

वकील ने यह भी कहा कि यहां याचिकाकर्ताओं समेत निकाले गए छात्र भारी मानसिक कठिनाई और पीड़ा से गुजर रहे हैं क्योंकि उनका पूरा करियर लटका हुआ है और फरवरी 2022 से उनकी शिक्षा लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। युद्धग्रस्त देश में शांति की बहाली की कोई संभावना नहीं है। 

याचिका में कहा गया है, "मौजूदा मामले में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि याचिकाकर्ता न तो यूक्रेन में अपने संबंधित संस्थानों में अपनी शिक्षा को फिर से शुरू करने की स्थिति में हैं और न ही मौजूदा नियमों के तहत उन्हें भारत में संस्थानों में अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति मिल रही है।"

याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 45 के तहत एनएमसी पर भारतीय मेडिकल छात्रों के प्रवास के लिए दिशानिर्देश और एसओपी तैयार करने के लिए एक उचित निर्देश जारी करने की भी मांग की है, जिन्हें समान शैक्षणिक वर्ष में एकमुश्त उपाय के रूप में यूक्रेन से भारतीय मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है।  

जस्टिस दुरैस्वामी मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
मद्रास हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस एम. दुरैस्वामी को सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह 13 सितंबर को कार्यभार ग्रहण करेंगे। कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मौजूदा चीफ जटिस मुनीश्वर नाथ भंडारी 12 सितंबर की शाम को सेवानिवृत्त होंगे।

ईवीएम पर रोक लगाने की मांग खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनावों में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल पर रोक वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में ईवीएम पर रोक लगा मतपत्र के इस्तेमाल की मांग की गई थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की बेंच ने सीआर जया सुकिन द्वारा दायर इस याचिका को खारिज कर दिया।

दरअसल, यह याचिका पहले दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई थी जिसे खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने 3 अगस्त,2021 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसे आज खारिज कर दिया गया। याचिका में कहा गया था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें देश की चुनाव प्रक्रिया में मतपत्रों को लाना जरूरी है। ईवीएम ने भारत में मतपत्रों की जगह ली जबकि इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। 
 

सीवीसी में रिक्तियों के मामले में केंद्र से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में रिक्तियों के मुद्दे से जुड़ी याचिका पर भी सुनवाई की। मामले में कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा। जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने तीन हफ्तों में जवाब देने का निर्देया दिया है। याचिका एक एनजीओ कॉमन काउज ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि समय पर सीवीसी में रिक्तियों को भरने का काम नहीं किया जा रहा है।

ईडी निदेशक के कार्यकाल से जुड़ी याचिका पर केंद्र की दलील
केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं पर सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने इन याचिकाओं को दबाव की रणनीति बताया। केंद्र की यह दलील प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) प्रमुख के कार्यकाल विस्तार और पांच साल तक के ऐसे विस्तार की अनुमति के प्रावधान वाले संशोधित कानून के खिलाफ नेताओं द्वारा दायर याचिका के मद्देनजर आई है। कोर्ट ने ऐसी आठ जनहित याचिकाओं के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की है। इनमें रणदीप सिंह सुरजेवाला और महुआ मोइत्रा की याचिकाएं भी शामिल हैं।

सशस्त्र बलों के नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सैन्य कर्मियों के वेतन और भत्ते से अलग पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण या गुजारा भत्ता देने के सशस्त्र बलों के नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर कर दिया। अदालत ने कहा कि यह एक कल्याणकारी उपाय है जो यह सुनिश्चित करने के लिए है कि पति या पत्नी को मझधार में नहीं छोड़ा जाए। सेना के सेवानिवृत्त और सेवारत कर्मियों ने यह कहते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है कि वे न्यायिक अधिकार को हड़पने और कर्मियों के खिलाफ रखरखाव के आदेश देने की कार्यवाही में सेना, वायु सेना और नौसेना की शक्ति और अधिकार क्षेत्र के मनमाने प्रयोग से दुखी और असंतुष्ट हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि ये सभी कल्याणकारी उपाय हैं। देश भर में सेना के जवानों को तैनात किया जाता है। यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके जीवनसाथी और बच्चे अधर में न रहें।  
 

तलाक, गोद लेने, अभिभावक, उत्तराधिकार मामलों पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तलाक, गोद लेने, अभिभावक, उत्तराधिकार, विरासत, रखरखाव, शादी की उम्र के लिए धर्म और लिंग-तटस्थ वर्दी कानून बनाने और गुजारा भत्ता के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग वाली याचिकाओं के एक बैच पर केंद्र से तीन सप्ताह के भीतर व्यापक प्रतिक्रिया मांगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि क्या कानून बनाने के लिए परमादेश की रिट के रूप में ऐसा निर्देश विधायिका को जारी किया जा सकता है, यह एक बुनियादी सवाल होगा। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने वकील याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय को भी अदालत के प्रति निष्पक्ष रहने और इन मुद्दों पर उनके द्वारा दायर इसी तरह की याचिकाओं का विवरण प्रदान करने को कहा।
 

सुप्रीम कोर्ट ने उस्मानाबाद जिले के किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी की बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी, जिसमें अदालत ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2020 में भारी बारिश के कारण सोयाबीन की फसल के नुकसान के लिए महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के 3.5 लाख से अधिक किसानों को मुआवजा देने के लिए कहा था।  मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने यह देखते हुए कि यह एक अलग तरह का बीमा था, जिसमें फसल, परिवार और किसानों की हर चीज दांव पर लगी थी, शीर्ष अदालत ने बीमा फर्म द्वारा रजिस्ट्री में जमा किए गए 200 करोड़ रुपये जारी करने का आदेश दिया।  
 
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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी ले सकते हैं

प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी इलाज के लिए विदेश जाने के लिए स्थानीय अदालत से मंजूरी ले सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की संयुक्त दलीलों पर ध्यान दिया और बनर्जी की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। विधि अधिकारी ने कहा कि बनर्जी स्थानीय अदालत से मंजूरी ले सकते हैं।

सिब्बल ने कहा कि अगर ईडी इस मुद्दे पर बनर्जी की याचिका का विरोध नहीं करती है तो वह बयान का स्वागत करेंगे। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इलाज के लिए दुबई जाने की मंजूरी मांगने वाली बनर्जी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। इसने 17 मई को तृणमूल कांग्रेस नेता और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी को 24 घंटे का अग्रिम नोटिस देने के बाद दिल्ली तलब करने के बजाय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से उनके कोलकाता कार्यालय में जांच करने के लिए कहा था।
 

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