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Supreme Court: मुस्लिमों के बहिष्कार के खिलाफ SC में याचिका, बिलकिस मामले में सुनवाई कल; पढ़ें अहम खबरें

Tue, 08 Aug 2023 08:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि गुरुग्राम में एक बहुत ही गंभीर बात हुई है। यहा पुलिसकर्मियों के साथ खड़े होकर कहा गया कि यदि आप इन लोगों को दुकानों में काम पर रखेंगे, तो आप सभी 'गद्दार' होंगे। इसे लेकर हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के लिए कई समूहों की ओर से किए गए आह्वान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ के सामने मामले का उल्लेख किया। उन्होंने उस वक्त इस मामले को उठाया, जब अनुच्छेद 370 मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ दोपहर के भोजन के लिए ब्रेक लेने वाली थी। 

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मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए सिब्बल ने कहा कि गुरुग्राम में एक बहुत ही गंभीर बात हुई है। यहा पुलिसकर्मियों के साथ खड़े होकर कहा गया कि यदि आप इन लोगों को दुकानों में काम पर रखेंगे, तो आप सभी 'गद्दार' होंगे। इसे लेकर हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

क्या है मामला?
दरअसल, मुसलमानों की हत्या और उनका सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार करने को लेकर हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में आयोजित रैलियों या पंचायतों में बयान दिया जा रहा है। इसी मामले में कथित तौर पर सरेआम दिए जाने वाले नफरती भाषणों को लेकर शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। हरियाणा में हुई हालिया साम्प्रदायिक झड़पों में छह लोगों की मौत हुई है।
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दो अगस्त के आदेश का हवाला दिया गया
पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला की ओर से दायर याचिका में शीर्ष न्यायालय के दो अगस्त के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया कि हमें उम्मीद और विश्वास है कि राज्य सरकारें और पुलिस यह सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई नफरती भाषण न दिया जाए। इसके साथ ही संपत्ति को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाए।

याचिका में क्या कहा गया?

  • याचिका में कहा गया कि शीर्ष कोर्ट के आदेश के बावजूद विभिन्न राज्यों में 27 रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें नफरती भाषण दिए गए। याचिका में एक अगस्त से लेकर सात अगस्त 2023 के बीच हुई कुछ रैली का जिक्र भी किया गया है। रैलियों से जुड़े वीडियो लिंक भी मुहैया कराए गए हैं। 
  • कहा गया कि दो अगस्त 2023 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो में हरियाणा के हिसार में ‘समस्त हिंदू समाज’ ने एक शोभायात्रा निकाली, जिसमें शामिल लोगों को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में यह चेतावनी देते सुना गया कि यदि दुकानदारों ने किसी मुस्लिम को काम पर रखा तो उनकी दुकानों का बहिष्कार किया जाएगा।
  • याचिका में दावा किया गया है कि चार अगस्त को मध्य प्रदेश में सागर जिला पुलिस की मौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक नेता ने हिंसा और मुसलमानों का बहिष्कार करने का खुलेआम आह्वान किया।

बिलकिस बानो मामले में जनहित याचिका दाखिल करने वालों की दलीलों पर सुप्रीम सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले व उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले कई लोगों की दलीलों पर बुधवार को सुनवाई करेगा। बिलकिस बानो की याचिका के अलावा सीपीआई (एम) नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लौल और लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा समेत कई अन्य जनहित याचिकाओं में दोषियों को दी गई राहत को चुनौती दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी छूट के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ के समक्ष एक दोषी के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने मंगलवार को कहा कि एक बार जब पीड़ित व्यक्ति अदालत में होता है, तो अन्य लोगों के पास इस प्रकृति के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार (अदालत में मुकदमा लाने का अधिकार) नहीं हो सकता है। 

पीठ ने कहा कि हमने पक्षों के वकील सुने हैं। अन्य रिट याचिकाएं जनहित याचिका की प्रकृति की हैं। जनहित याचिकाओं की विचारणीयता के संबंध में प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है। पीठ ने कहा कि प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई के लिए मामले को बुधवार दोपहर तीन बजे सूचीबद्ध करें। एक जनहित याचिका में उपस्थित वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वह मामले के तथ्यों पर अदालत को संबोधित नहीं करेंगी और पूरी तरह से कानून के प्रस्ताव पर बहस करेंगी।
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बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ जमीयत पहुंचा शीर्ष कोर्ट
मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नूंह हिंसा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा है कि जिनके घरों को तोड़ा गया है, उनको अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। उनके पुनर्वास की व्यवस्था नहीं है। पिछले कुछ दिनों में सांप्रदायिक हिंसा में छह लोगों की हत्या के बाद नूंह जिले में अधिकारियों ने बुलडोजर चलाया था। पढ़ें पूरी खबर
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