बिलकिस बानो मामले में जनहित याचिका दाखिल करने वालों की दलीलों पर सुप्रीम सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले व उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले कई लोगों की दलीलों पर बुधवार को सुनवाई करेगा। बिलकिस बानो की याचिका के अलावा सीपीआई (एम) नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लौल और लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा समेत कई अन्य जनहित याचिकाओं में दोषियों को दी गई राहत को चुनौती दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी छूट के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ के समक्ष एक दोषी के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने मंगलवार को कहा कि एक बार जब पीड़ित व्यक्ति अदालत में होता है, तो अन्य लोगों के पास इस प्रकृति के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार (अदालत में मुकदमा लाने का अधिकार) नहीं हो सकता है।
पीठ ने कहा कि हमने पक्षों के वकील सुने हैं। अन्य रिट याचिकाएं जनहित याचिका की प्रकृति की हैं। जनहित याचिकाओं की विचारणीयता के संबंध में प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है। पीठ ने कहा कि प्रारंभिक आपत्ति पर सुनवाई के लिए मामले को बुधवार दोपहर तीन बजे सूचीबद्ध करें। एक जनहित याचिका में उपस्थित वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वह मामले के तथ्यों पर अदालत को संबोधित नहीं करेंगी और पूरी तरह से कानून के प्रस्ताव पर बहस करेंगी।
बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ जमीयत पहुंचा शीर्ष कोर्ट
मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नूंह हिंसा के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा है कि जिनके घरों को तोड़ा गया है, उनको अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है। उनके पुनर्वास की व्यवस्था नहीं है। पिछले कुछ दिनों में सांप्रदायिक हिंसा में छह लोगों की हत्या के बाद नूंह जिले में अधिकारियों ने बुलडोजर चलाया था।
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