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SC Updates: पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज; भूपेश बघेल को राहत देने से इनकार

Fri, 07 Aug 2026 03:29 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाओं के जरिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता का कहना था कि यशवंत वर्मा के इस्तीफा देने से उनके खिलाफ कथित अवैध नकदी रखने के मामले में आपराधिक कार्रवाई खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने अदालत को बताया कि इस बार उन्होंने पहले से शिकायत भी दर्ज कराई है।
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हालांकि, पीठ ने कहा कि पहले भी ऐसी याचिका खारिज हो चुकी है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने टिप्पणी की कि यह केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास है। यशवंत वर्मा ने अप्रैल 2026 में अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके खिलाफ दिल्ली स्थित सरकारी आवास में मार्च 2025 में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने के आरोपों को लेकर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस्तीफे के बाद संसद में चल रही महाभियोग की कार्रवाई स्वतः समाप्त हो गई।
 

भूपेश बघेल की चुनाव याचिका मामले में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राहत देने से इनकार करते हुए उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि बघेल को सुनवाई के दौरान चुनाव न्यायाधिकरण के सामने अपने सभी कानूनी तर्क रखने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने बघेल की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि उनके पास अपने बचाव में कई तर्क हैं, जिन्हें ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है।

भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव याचिका कानून के अनुसार सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रचार समाप्त होने के बाद 16 नवंबर 2023 को एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यदि यह आरोप सही भी मान लिया जाए, तब भी यह जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126 का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसे भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता। बघेल पर आरोप है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद उन्होंने रोड शो या रैली की, जिससे चुनाव आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन हुआ। अब इस मामले की आगे सुनवाई हाईकोर्ट के चुनाव न्यायाधिकरण में होगी।
 
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SIR मामले: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से सुरक्षा पर फैसला लेने को कहा
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे अपीलीय न्यायाधिकरण के प्रमुख न्यायमूर्ति अनन्या कांति रॉय सरस्वती की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती से सुरक्षा उपलब्ध कराने के अनुरोध पर आवश्यक कदम उठाने को कहा। न्यायमूर्ति रॉय सरस्वती ने अपने दायित्व की संवेदनशील प्रकृति का हवाला देते हुए सुरक्षा की मांग की थी। इससे पहले 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीशों की अध्यक्षता में स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने का आदेश दिया था।

RTI कानून में बदलाव को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के जरिए किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि निजता के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संशोधन के बाद सार्वजनिक हित में व्यक्तिगत जानकारी साझा करने का प्रावधान कमजोर हो गया है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होगी। वहीं केंद्र का कहना है कि यह बदलाव निजता के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए किया गया है। केंद्र सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए दो से तीन सप्ताह का समय मांगा है।
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