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SC: आय से अधिक संपत्ति मामले में मंत्री पेरियासामी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत की कार्यवाही को रोका

Wed, 20 Aug 2025 09:58 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे तमिलनाडु के मंत्री आई पेरियासामी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने 18 अगस्त को इस मामले में नोटिस भी जारी किया है।पीठ ने कहा कि डिंडीगुल में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सह विशेष न्यायाधीश के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक रहेगी।
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शीर्ष अदालत ने पेरियासामी की अपील पर आदेश पारित किया। पेरियासमी ने 28 अप्रैल के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। मद्रास हाईकोर्ट ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा दायर याचिकाओं पर विशेष अदालत को उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था।

पेरियासामी पर आरोप है कि उन्होंने 2006 से 2010 के बीच मंत्री रहते हुए अपने और अपनी पत्नी पी सुशीला तथा पुत्रों पी सेंतिलकुमार और पी प्रभु के नाम पर 2.1 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी। डीवीएसी ने उनको आरोपमुक्त किये जाने को चुनौती दी और 2018 में उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की। पेरियासामी वर्तमान डीएमके सरकार में ग्रामीण विकास, पंचायत और पंचायत संघ विभाग संभाल रहे हैं।
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झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के तीन कर्मचारियों की नियुक्ति बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के तीन कर्मचारियों की नियुक्ति बहाल करते हुए कहा कि न्याय का तकाज़ा है कि दोषियों और निर्दोषों के बीच फर्क किया जाए, न कि सामूहिक तौर पर नियुक्तियों को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के दिसंबर 2021 के आदेश को पलटते हुए कहा कि इन कर्मचारियों की नियुक्तियां अधिकृत पदों पर हुई थीं, प्रक्रिया पारदर्शी थी और किसी तरह की धोखाधड़ी साबित नहीं हुई। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि सभी नियुक्तियों को “एक झटके में” रद्द करने से ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूटता है और प्रशासन की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों में यदि कुछ प्रक्रियागत खामियां भी थीं तो वे केवल ‘अनियमित’ थीं, ‘अवैध’ नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में ऐसे मामलों में अदालतों और अधिकारियों को ‘डॉक्ट्रिन ऑफ सेवरेबिलिटी’ यानी अलग-अलग जांच का सिद्धांत अपनाने की नसीहत दी। अदालत ने बहाल कर्मचारियों को सेवा निरंतरता और वरिष्ठता का लाभ देने का आदेश दिया, हालांकि उन्हें वेतन एरियर नहीं मिलेगा।

कानूनी सहायता और मध्यस्थता से हर नागरिक तक न्याय पहुंचाना संभव: सीजेआई
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई ने कहा है कि देश में केवल पारंपरिक मुकदमेबाजी के सहारे न्याय प्रणाली को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कानूनी सहायता और मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक उपायों के जरिए हर नागरिक के लिए न्याय को सुनिश्चित करना होगा। वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सभी के लिए न्याय कानूनी सहायता और मध्यस्थता बार और बेंच की सहयोगात्मक भूमिका विषयक व्याख्यान में बोल रहे थे। सीजेआई ने कहा कि संविधान हर नागरिक को न्याय का वादा करता है, लेकिन व्यवहार में यह यात्रा लंबी और जटिल होती है। विशेषकर कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए न्याय तक पहुंचना सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि अदालतें कई बार दूर होती हैं, कार्यवाही जटिल होती है और सक्षम वकीलों तक पहुंच सीमित रहती है, जिससे न्याय केवल आदर्श बनकर रह जाता है। उन्होंने बार और बेंच की संयुक्त जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि वकील न सिर्फ मुवक्किलों के प्रतिनिधि हैं बल्कि न्याय के संरक्षक भी हैं। वहीं, जजों पर निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करने का कर्तव्य है। सीजेआई ने जोर दिया कि व्यावसायिकता, ईमानदारी और सहानुभूति से ही न्याय देश के हर कोने तक पहुंच सकता है।

निष्पक्ष व तेज ट्रायल बिना आरोपी जेल में नहीं रह सकता- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी आरोपी को निष्पक्ष और तेज सुनवाई के बिना लंबे समय तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है। यह टिप्पणी उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुनवाई करते हुए दी जिसमें एक आरोपी को जमानत दी गई थी और दूसरे को नहीं। मामला 2020 में दर्ज यूएपीए केस से जुड़ा है, जिसमें 17 लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे और जांच NIA को सौंपी गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद ट्रायल शुरू नहीं होना न्याय के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि दो साल के भीतर सुनवाई पूरी की जाए, ताकि आरोपी अनिश्चितकाल तक जेल में न रहें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन आरोपियों को जमानत दी गई है, उनके खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला सही है, क्योंकि उन पर प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव साबित नहीं हुआ। वहीं, जिनकी जमानत खारिज हुई, उनके खिलाफ गंभीर साक्ष्य मौजूद थे। अदालत ने अभियोजन और आरोपियों दोनों को सहयोग सुनिश्चित करने का आदेश दिया और चेतावनी दी कि ट्रायल में देरी की कोशिश पर जमानत रद्द की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो अतिरिक्त हाईकोर्ट जजों को स्थायी करने को मंजूरी दी 
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गौहाटी उच्च न्यायालय में दो अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की बैठक 19 अगस्त को हुई। सुप्रीम कोर्ट से जारी सूचना में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 19 अगस्त, 2025 को हुई बैठक में गौहाटी उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायाधीश के रूप में निम्नलिखित अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसमें न्यायमूर्ति बुदी हाबुंग और न्यायमूर्ति एन उन्नी कृष्णन नायर (एसआईसी) शामिल हैं।  कॉलेजियम ने अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी को 10 नवंबर से एक वर्ष के नए कार्यकाल के लिए उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की।

1984 दंगों का मामला: सज्जन कुमार और बलवान खोखर की याचिका पर सुनवाई 24 सितंबर तक टली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार और पूर्व पार्षद बलवान खोखर की याचिकाओं पर सुनवाई 24 सितंबर तक टाल दी। यह मामला 1984 के सिख विरोधी दंगों में मिली सजा से जुड़ा है। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और विजय विष्णोई की पीठ ने सुनवाई स्थगित की क्योंकि सीबीआई के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपलब्ध नहीं थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 में खोखर की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी और कुमार को एक मामले में दोषी ठहराया था। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर सिख समुदाय पर हमले हुए थे। यह मामला चार दशक बाद भी अदालतों में लंबित है।
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