सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से नीट-पीजी काउंसलिंग कराने की मांग खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पीजी 2024 काउंसलिंग के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) राउंड 3 को नए सिरे से कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभी देश भर में राउंड 3 की काउंसलिंग चल रही है।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की तरफ से पेश वकील की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। वकील ने कहा यदि अब इस तरह का कोई निर्देश दिया जाता है तो इसका सभी राज्यों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा क्योंकि छात्र पहले ही काउंसलिंग में भाग ले चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीजी में दाखिले के लिए एक समय सीमा है।
पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर हम तीन याचिकाकर्ताओं की इस याचिका पर विचार करते हैं तो हमारे सामने अन्य 30 याचिकाएं आ जाएंगी। 4 फरवरी को शीर्ष अदालत ने याचिका पर केंद्र, एनएमसी और अन्य से जवाब तलब किया था। दरअसल, याचिकाकर्ता का कहना था कि मध्य प्रदेश में राज्य काउंसलिंग के दूसरे राउंड के पूरा होने में देरी के बाद सीट ब्लॉक होने के मामले सामने आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के कारगिल युद्ध से पहले पाकिस्तान की घुसपैठ के संबंध में सूचना पर कार्रवाई करने में सेना की ओर से चूक के आरोप वाली पूर्व सैन्य अधिकारी की जनहित याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा, न्यायपालिका आम तौर पर राष्ट्रीय रक्षा के मामले में नहीं जाती है। 1999 के युद्ध में जो कुछ हुआ, वह कार्यकारी निर्णय से संबंधित आंतरिक मामला है। पीठ पंचकूला के पूर्व सैन्य अधिकारी मनीष भटनागर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
छात्रों को डाक मतपत्र अधिकार की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निवास क्षेत्र से बाहर रहने वाले छात्रों के लिए डाक मतपत्र सुविधाओं के मुद्दे से जुड़़ी जनहित याचिका को खारिज कर दिया। सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि देश का निर्वाचन आयोग पहले से ही अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने वाले छात्रों को उनके वर्तमान स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। शीर्ष अदालत अर्नब कुमार मलिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपने मूल स्थानों से बाहर रहने वाले छात्रों के लिए डाक मतपत्र अधिकार की मांग की गई थी।
पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान डाक मतपत्र प्रणाली रक्षा कर्मियों और बुजुर्गों जैसी विशिष्ट श्रेणियों के लिए आरक्षित है। सीजेआई ने उदाहरण देते हुए कहा कि जस्टिस कुमार अपना वोट डालने के लिए घर गए थे। याचिकाकर्ता के वकील ने छात्रों के मतदान अधिकारों को सुविधाजनक बनाने के लिए एनआरआई के लिए उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया। हालांकि, याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि मतदाता सूची पर मैनुअल विशेष रूप से छात्रों को अपने मेजबान शहर या कस्बे में मतदाता के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति देता है, बशर्ते वे पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।