सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को जस्टिस वर्मा मामले में न्यायिक जवाबदेही और तेलंगाना में अवैध जंगलों की कटाई मामले समेत कई मुद्दों पर अहम सुनवाई हुई। कटाई को लेकर पर्यावरण मामले में अदालत ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा। इस मामले में कोर्ट ने जवाबदेही और पारदर्शिता की सख्त जरूरत बताई।
जस्टिस वर्मा की याचिका पर सुनवाई के लिए गठित होगी पीठ
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह एक बेंच गठित करेगा जो जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें उन्होंने आतंरिक जांच समिति की उस रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ उनके आवास पर नकदी मिलने के मामले में टिप्पणी की गई थी। यह मामला आज चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी आर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, राकेश द्विवेदी, सिद्धार्थ लूथरा, सिद्धार्थ अग्रवाल और वकील जॉर्ज पोटन पूथिकोटे, मनीषा सिंह समेत अन्य लोग जस्टिस वर्मा की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा, हमने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज की ओर से याचिका दायर की है। इसमें कुछ सांविधानिक मुद्दे शामिल हैं। मैं निवेदन करता हूं कि जल्द से जल्द एक बेंच गठित की जाए। सीजेआई ने जवाब में कहा कि इस मामले को लेना उनके लिए उचित नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने कहा, हम इस पर विचार करेंगे और एक उपयुक्त बेंच बनाएंगे। तेलंगाना में जंगलों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के कांचा गचिबोवली इलाके में जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सतत विकास जरूरी है, लेकिन इसका मतलब जंगलों पर बुलडोजर चलाना नहीं है। अदालत कांचा गचिबोवली में पेड़ों की कटाई के मामले की स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने पूछा कि जब कोर्ट की छुट्टी थी, तब ही क्यों पेड़ काटे गए? इससे पहले 15 मई को कोर्ट ने जंगल की बहाली या अफसरों को जेल भेजने की चेतावनी दी थी। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 13 अगस्त तय की है। अदालत ने राज्य सरकार से 100 एकड़ काटे गए जंगल की पुनर्स्थापना की योजना भी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी से मिली मुआवजे की मंजूरी को किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गौतम बुद्ध नगर की एक जमीन पर दिए गए मुआवजे के अपने 2022 के आदेश को वापस ले लिया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश धोखाधड़ी से हासिल किया गया था, इसलिए इसे रिकॉर्ड से मिटाना जरूरी है। यह ज़मीन 1997 में खरीदी गई थी और 2005 में नोएडा प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित की गई थी। आरोप था कि रेड्डी वीरणा ने अन्य दो मालिकों विश्णु वर्धन और टी. सुधाकर को बाहर कर खुद को अकेला मालिक बताकर कोर्ट से मुआवजा ले लिया। विश्णु वर्धन ने कोर्ट से गुहार लगाई और मामला दोबारा खुलवाया। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी से हासिल किया गया कोई भी आदेश शून्य माना जाएगा, चाहे वह अंतिम क्यों न हो। कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया जिसमें वीरणा को जमीन का एकमात्र मालिक माना गया था और मुआवजा बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया था।
1988 के रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने माना आरोपी नाबालिग था, सजा रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के एक रेप केस में आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उसकी सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि आरोपी अपराध के समय नाबालिग था। मुख्य न्यायाधीशन की पीठ ने अजमेर जिला न्यायाधीश से जांच करवाई, जिसमें सामने आया कि अपराध की तारीख (17 नवंबर 1988) को आरोपी की उम्र 16 साल 2 महीने 3 दिन थी। कोर्ट ने कहा कि बाल न्याय अधिनियम, 2000 के तहत नाबालिगों पर अलग प्रक्रिया लागू होती है, इसलिए ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दी गई पांच साल की सजा रद्द की जाती है। हालांकि, कोर्ट ने माना कि पीड़िता की गवाही और मेडिकल सबूतों के आधार पर आरोपी का दोष साबित हुआ है। अब मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया है, जहां आरोपी को 15 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया गया है।
अरावली में अवैध खनन पर कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने नूंह जिले की अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन से बर्बाद हुई जमीन की बहाली के लिए केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) को हरियाणा सरकार से मिलकर योजना बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को सीईसी को पूरा सहयोग देने को कहा। यह आदेश उस मामले में आया है जिसमें खनन माफिया ने कथित रूप से 1.5 किलोमीटर लंबी अवैध सड़क बना दी थी। इस निर्माण से वनों और तेंदुओं के आवागमन वाले गलियारे को नुकसान पहुंचा है। अदालत ने पहले भी राज्य सरकार की ढिलाई पर सख्त टिप्पणी की थी। सीईसी की रिपोर्ट में पर्यावरण क्षति और अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई थी।
हीटवेव से श्रमिकों की सुरक्षा पर केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में भीषण गर्मी से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बचाने के लिए दायर जनहित याचिका पर बुधवार को केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्रामीण विकास मंत्रालय, सभी राज्य सरकारों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को नोटिस जारी किया। याचिका में गर्मी से सुरक्षा के लिए अनिवार्य राष्ट्रीय नियम बनाने और कार्यस्थलों पर समायोजित समय, पानी, विश्राम स्थल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की मांग की गई है। याचिकाकर्ता आदिल शरफुद्दीन ने 2024 में ही 733 मौतों का हवाला देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने और मुआवजा प्रणाली लागू करने की भी मांग की गई है।
धर्मस्थल हत्याकांड पर याचिका सुनने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के धर्मस्थल हत्याकांड से जुड़े गैग ऑर्डर के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका बंगलूरू की एक अदालत के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ थी, जिसमें 390 मीडिया संस्थानों को करीब 9,000 लिंक और खबरें हटाने का निर्देश दिया गया था। चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पहले हाईकोर्ट जाए। यह मामला श्री मंजुनाथस्वामी मंदिर के सचिव हर्षेन्द्र कुमार द्वारा दायर मानहानि केस से जुड़ा है। केस में महिला हत्या के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी भी गठित हो चुकी है।
पावर कट से प्रभावित नीट छात्रों को राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NEET-UG 2025 में बिजली गुल होने से प्रभावित दो छात्रों को काउंसलिंग में शामिल होने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और ए. एस. चंदूरकर की बेंच ने कहा कि याचिकाओं पर अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी। दोनों छात्रों नव्या नायक और एस साई प्रिया ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें री-टेस्ट की मांग खारिज कर दी गई थी। एनटीए की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लाखों छात्रों की परीक्षा प्रभावित नहीं की जा सकती। अदालत ने कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
ये भी पढ़ें: Lok Sabha Ruckus: 'संसद में सड़क जैसा व्यवहार...', लोकसभा में विपक्ष के हंगामे पर बिफरे स्पीकर बिरला ने चेताया
सुप्रीम कोर्ट सतकोसिया टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण को लेकर याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार
सुप्रीम कोर्ट ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में कथित अवैध निर्माण को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। चीफ जस्टिस बी आर गवई (सीजेआई), जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष वकील गौरव कुमार बंसल ने यह याचिका लगाई और आग्रह किया कि इस मामले पर सुनवाई जरूरी है। बेंच ने कहा कि वह इस याचिका पर किसी अगली तारीख को सुनवाई करेगी। बंसल ने यह भी चिंता जताई कि स्थानीय प्रशासन ने संरक्षित क्षेत्र के अंदर इको-टूरिज्म (पर्यावरण पर्यटन) के लिए निर्माण की अनुमति दे दी है। उन्होंने कहा, जिला कलेक्टर ने इको-टूरिज्म के लिए निर्माण की अनुमति दी है। यह कैसे हो सकता है? मैं तो बस जंगलों के लिए लड़ रहा हूं। सतकोसिया टाइगर रिजर्व ओडिशा के अंगुल, कटक, नयागढ़ और बौध जिलों में फैला हुआ है। यह बाघों, हाथियों और कई संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) है।