सुप्रीम कोर्ट ने बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र को मेडिकल आधार पर आईआईटी रुड़की में ट्रांसफर की अनुमति दे दी। अदालत ने IIT खड़गपुर को एक सप्ताह के भीतर ट्रांसफर/माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य जरूरी दस्तावेज जारी करने का निर्देश दिया। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया। छात्र IIT खड़गपुर में आर्किटेक्चर का अध्ययन कर रहा है।
याचिका में छात्र ने कहा था कि IIT खड़गपुर द्वारा ट्रांसफर से इनकार किए जाने के कारण वह जीवनरक्षक चिकित्सा उपचार से वंचित हो रहा है। उसने यह भी दावा किया कि संस्थान पहले अन्य छात्रों को भी मेडिकल आधार पर ट्रांसफर की अनुमति दे चुका है। याचिका के अनुसार, छात्र बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसे विशेष प्रकार की रिपीटिटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन थेरेपी के साथ-साथ माता-पिता की निगरानी की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में छात्र को IIT रुड़की में ट्रांसफर और प्रवेश की सुविधा देने के लिए आवश्यक दस्तावेज जारी किए जाने चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्र को IIT रुड़की में प्रवेश से जुड़े सभी नियमों, फीस संरचना और अन्य वित्तीय दायित्वों का पालन करना होगा।
आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत नहीं मिली, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिषेक बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस से सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया गया था। अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ एक स्पेशल लीव याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने अपनी आंखों की बीमारी के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगी थी।
अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 3 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है। इससे पहले, बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 2016 में सड़क दुर्घटना में आंख में चोट लगने के बाद से वे लगभग एक दशक से अमेरिका में आंखों का इलाज करवा रहे हैं। हालांकि, 20 जुलाई को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने सांसद को तुरंत विदेश जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया और इसके बजाय उन्हें पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के विशेषज्ञों से सलाह लेने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा के अनुरोध पर आगे का फैसला एसएसकेएम के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट की जांच के बाद ही लिया जाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार ने विदेश यात्रा के लिए बनर्जी की याचिका का विरोध किया था। एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि तृणमूल नेता से जुड़े कई मामले लंबित हैं और उन्हें विदेश जाने की इजाजत देने से जांच में मुश्किलें आ सकती हैं।
यह कार्यवाही उस मामले से भी जुड़ी है जिसमें बनर्जी पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान नफरत और हिंसा भड़काने वाले भाषण देने का आरोप है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकाने वाली कथित टिप्पणियां भी शामिल हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले बनर्जी को गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी, जो कुछ शर्तों के अधीन थी। इन शर्तों में से एक यह थी कि विदेश यात्रा करने से पहले उन्हें कोर्ट से इजाजत लेनी होगी।
इलाज के लिए विदेश यात्रा की तत्काल इजाजत देने से इनकार करते हुए, हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को उनकी अंतरिम सुरक्षा 6 अक्टूबर तक बढ़ा दी और उन्हें जांच में सहयोग जारी रखने का निर्देश दिया।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे बनर्जी ने सबसे पहले 23 जून को कलकत्ता हाई कोर्ट में अर्जी देकर आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की सात दिन की इजाजत मांगी थी। अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद में एक राजनीतिक कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय सड़क हादसे में उनकी आंखों में गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद उन्होंने भारत और विदेश के अस्पतालों में इलाज कराया था।