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सुप्रीम कोर्ट: कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज; कहा- सिर्फ सनसनी पैदा करना मकसद

Mon, 14 Oct 2024 12:00 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने क्लास एक्शन दायर करने के लिए कहा। उन्होंने आगे कहा कि यह भी समझने की कोशिश करें कि अगर आपने वैक्सिन नहीं ली तो इसका दुष्प्रभाव क्या हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कोविड-19 टीकों के कार खून के थक्के जमने का आरोप लगाया गया था। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि याचिका केवल सनसनी पैदा करने के लिए की गई थी। 

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पीठ ने क्लास एक्शन दायर करने के लिए कहा। उन्होंने आगे कहा, "यह भी समझने की कोशिश करें कि अगर आपने वैक्सिन नहीं ली तो इसका दुष्प्रभाव क्या हो सकता है। हम इस मुद्दे को उछालना नहीं चाहते हैं। यह केवल सनसनी पैदा करने के लिए किया गया था।" याचिका प्रिया मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
दूरदर्शन पर 24 घंटे सिंधी भाषा का चैनल शुरू करने संबंधी याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने दूरदर्शन पर 24 घंटे सिंधी भाषा का चैनल शुरू करने का केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) सिंधी संगत की याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि भाषा को संरक्षित करने के अन्य तरीके भी हो सकते हैं। कोर्ट के सामने एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि भाषा को संरक्षित करने का एक तरीका सार्वजनिक प्रसारण है। हाईकोर्ट ने 27 मई को एनजीओ की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे उसने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। 

चारधाम परियोजना करीब 75 फीसदी पूरी: केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड में चारधाम परियोजना का 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यह परियोजना 900 किलोमीटर लंबी है और इसका मकसद उत्तराखंड के चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केंदारनाथ और बद्रीनाथ को आपस में जोड़ना है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस सी.टी.रवि कुमार और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त निगरानी समिति ने शीर्ष कोर्ट में दो रिपोर्टें पेश की हैं। भाटी ने कहा कि यह निगरानी समिति पूर्व जज ए.के. सीकरी की अध्यक्षता में काम कर रही है। भाटी ने बताया कि समिति की रिपोर्ट अगस्त 2024 में प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कहा गया था कि आवंटित काम का 75 फीसदी पूरा हो चुका है।  

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) से अप्राकृतिक यौन संबंध के अपराधों के लिए दंडात्मक प्रावधानों को हटाने की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मुद्दा संसद के दायरे में आता है और कोर्ट इस मामले में कोई निर्देश नहीं दे सकते। पीठ ने कहा, हम संसद को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। हम किसी अपराध को नहीं बना सकते..अनुच्छेद 142 के तहत अदालत यह निर्देश नहीं दे सकती कि कोई विशेष कार्य अपराध है। ऐसा अभ्यास संसद के दायरे में आता है। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर सरकार से संपर्क करने की मंजूरी दी। 
 

सुप्रीम कोर्ट का संपत्तियों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर में संपत्तियों के कथित ध्वस्तीकरण के खिलाफ एक नई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस बी.आर. गवाई और जस्टिस पी.के. मिश्रा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई में रुचि नहीं दिखाई, जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उन्होंने हाल ही में उन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिनमें दावा किया गया है कि कई राज्यों में अपराधों के आरोपियों की संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है।   

पूर्व मंत्री रूडी ने सड़कों व राजमार्गों पर अतिक्रमण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल हटाने तथा उन पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश देने की मांग की।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ को रूडी ने बताया कि वह राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनधिकृत कब्जे हटाने से संबंधित एक लंबित मामले में हस्तक्षेप करना चाहते हैं। वह पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। पीठ ने रूडी को ऑनलाइन उपस्थित होने की अनुमति देते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर उनकी बात सुनेगी।

शीर्ष अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को 27 अगस्त को शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देशों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। न्यायमूर्ति ओका ने नटराज से कहा, “आपको राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुद्दे पर न्यायमित्र स्वाति घिलडियाल द्वारा प्रस्तुत नोट पर अपना जवाब दाखिल करना चाहिए।” इस मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल के अधिकार के खिलाफ याचिका पर विचार करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) को केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में पांच सदस्यों को मनोनीत करने के अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को विचार करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने याचिकाकर्ता रविन्द्र कुमार शर्मा को उच्च न्यायालय जाने को कहा। पीठ ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता देते हुए कहा, “जिन मामलों में, हमने याचिका पर पहले विचार किया, उनमें हमने पाया कि कई चीजें छूट गई हैं।”

जम्मू-कश्मीर में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन को बहुमत मिला है। इसने 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीट जीती हैं। पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है और स्पष्ट किया कि उसने इस मुद्दे के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। 

न्यायालय ने झारखंड सरकार को कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति मामले में एक सप्ताह का समय दिया
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो सरकार द्वारा कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता की ‘‘तदर्थ’’ नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए सोमवार को राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ नरेश मकानी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने राज्य में शीर्ष पुलिस अधिकारी की नियुक्ति पर शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेशों की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया है।

याचिका पर सुनवाई के समय झारखंड सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई एक सप्ताह के भीतर की जाए, अन्यथा प्रतिवादियों के लिए ‘‘मिशन पूरा’’ हो जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट का विस्तार: कानून मंत्री बोले- आधुनिक ढांचे से न्यायपालिका को होगा लाभ
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट का विस्तारित भवन, नया संसद भवन और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना एक आधुनिक ढांचा सुनिश्चित करने के प्रयास का हिस्सा हैं, जिससे कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को लाभ होगा। सुप्रीम कोर्ट के भवन की आधारशिला रखने के मौके पर आयोजित समारोह में मंत्री ने बताया कि यह परियोजना अगले पांच वर्षों में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा दो चरणों में पूरी की जाएगी, जिसकी लागत 795 करोड़ रुपये से अधिक होगी। नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सभी कोर्ट रूम समावेशी बनाए जाएंगे और सभी संबंधित पक्षों को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। उन्होंने कहा कि जीवन को आसान बनाने के लिए इस परियोजना से न्यायपालिका के लिए काम करने की सुविधा बढ़ाई जाएगी। 
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