फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: एल्गार परिषद केस में साढ़े 7 साल से जेल में गाडलिंग, तीसरे जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग

Tue, 21 Jul 2026 02:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला ग्रापिक
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने मंगलवार को 2018 के एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। गाडलिंग की याचिका जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ के सामने सूचीबद्ध थी।
विज्ञापन


जब मामला सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस  प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा, यह किसी दूसरी पीठ के पास जाएगा, मेरे साथी जज को कुछ परेशानी है। जस्टिस चंद्रशेखर इस मामले की सुनवाई से अलग होने वाले तीसरे जज हैं। इससे पहले जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एएस चंदूरकर भी इस मामले से खुद को अलग कर चुके हैं।

पिछले हफ्ते गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले का जिक्र किया था और याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की थी। सिब्बल ने कहा था कि गाडलिंग साढ़े सात साल से जेल में हैं और उन्होंने जल्द सुनवाई की मांग की थी।
विज्ञापन


उन्होंने कोर्ट को बताया था कि उनकी जमानत याचिका पर पहली बार 2023 में नोटिस जारी किया गया था। लेकिन बाद में कई बार जजों के सुनवाई से अलग होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने पीठ से मामले की जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की थी।

8 अगस्त 2025 को गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने भी तत्कालीन सीजेआई बीआर गवई से जल्द सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने अपने मुवक्किल की लंबे समय से चल रही जेल में रहने की स्थिति का हवाला दिया था। ग्रोवर ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका की सुनवाई 11 बार टाली जा चुकी है। 

पिछले साल 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गाडलिंग और कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत सुनवाई टाल दी थी। कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर भी सुनवाई टाल दी थी, जिसमें कार्यकर्ता महेश राउत को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी। राउत को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। लेकिन एनआईए के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बाद उस आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

सुरेंद्र गाडलिंग पर क्या आरोप हैं?
  • सुरेंद्र गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों की मदद की और इस मामले में फरार आरोपियों समेत कई सह-आरोपियों के साथ साजिश रची।
  • उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
  • अभियोजन पक्ष का दावा है कि गाडलिंग ने भूमिगत माओवादियों को सरकारी गतिविधियों की गोपनीय जानकारी और कुछ क्षेत्रों के नक्शे उपलब्ध कराए थे।
  • आरोप है कि उन्होंने माओवादियों से सूरजगढ़ खदानों के संचालन का विरोध करने को कहा और कई स्थानीय लोगों को आंदोलन से जुड़ने के लिए उकसाया।
  • गाडलिंग पुणे में 31 दिसंबर 2017 को आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़े एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में भी आरोपी हैं।
  • पुलिस का दावा था कि इन भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी।

असम एनआरसी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें असम में जारी अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से बाहर किए गए लोगों के लिए अपील प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

यह याचिका असम राज्य जमीयत उलेमा की ओर से दाखिल की गई है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कई लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जिन लोगों के नाम बाहर किए गए हैं, उनके लिए अपील का प्रावधान है। लेकिन कुछ भी नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के मुद्दे को उठाने वाली एक अन्य याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इस पर पीठ ने कहा, नोटिस जारी करें। इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अलावा असम सरकार और राज्य के एनआरसी समन्वयक कार्यालय समेत अन्य पक्षों से जवाब मांगा है।
 

सुप्रीम कोर्ट सुनेगा यूपी सरकार की याचिका, इंजीनियर को राहत देने वाले हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर निशांत अग्रवाल से जुड़े कथित जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अग्रवाल को जासूसी और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट) के प्रमुख आरोपों से राहत दी गई थी। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 तय की है।

हालांकि हाई कोर्ट ने यह माना था कि अग्रवाल ने संवेदनशील डेटा अवैध रूप से अपने पास रखा था। निशांत अग्रवाल को 2018 में सैन्य खुफिया और यूपी व महाराष्ट्र एटीएस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था। उन पर पाकिस्तान की आईएसआई को संवेदनशील रक्षा संबंधी जानकारी देने का आरोप लगा था। जून 2024 में नागपुर की अदालत ने उन्हें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन

बिजली दर विरोध प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट बोला- मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भीड़ को उकसाने का आरोप नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में चंडीगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आरोपियों पर प्रदर्शनकारी भीड़ को उकसाने का कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भगवंत मान और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र रद्द कर दिए गए थे। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के आवश्यक तत्व भी मौजूद नहीं हैं। मामला 2020 के उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और पथराव की कोशिश की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें