अरुणाचल कॉन्ट्रैक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव और गृह सचिव को किया तलब
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों के आवंटन से जुड़े मामले में राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने सीबीआई की ओर से जांच में सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) से जवाब मांगा है। दोनों अधिकारियों को 24 अगस्त को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि जांच एजेंसी को जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यदि जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा था तो राज्य सरकार को इतनी छूट क्यों दी गई। इससे पहले 6 अप्रैल को अदालत ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों से कथित तौर पर जुड़ी कंपनियों को सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेके दिए जाने के आरोपों की प्रारंभिक जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था।
फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा- अनिश्चितता से छात्रों का भविष्य प्रभावित
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हर साल आधार पर कॉलेजों को मान्यता देने की व्यवस्था छात्रों के भविष्य में अनिश्चितता पैदा कर रही है। अदालत ने पूछा कि जब किसी कॉलेज के पास सभी जरूरी सुविधाएं हैं, तो हर साल नई मंजूरी लेने की जरूरत क्यों पड़ती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की तर्ज पर राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग बनाने के लिए नया कानून लाने पर काम कर रही है। अदालत ने कहा कि संसद में विचाराधीन विधेयक को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त के बाद की जाएगी।
ट्रांसजेंडर संशोधन कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर 17 अगस्त को अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने विशेष रूप से उन ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों पर चिंता जताई, जिन्हें पुराने कानून के तहत पहचान पत्र जारी किए गए थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि पुराने कानून के तहत जारी ट्रांसजेंडर पहचान पत्र रखने वाले लोगों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि संशोधित कानून लागू होने के बाद राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल काम नहीं कर रहा है और कई लोगों को पहचान, यात्रा और इलाज से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।