फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: ध्वस्त की जा चुकी दरगाह पर उर्स आयोजित करने की अनुमति देने संबंधी याचिका खारिज; सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Fri, 31 Jan 2025 12:35 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

गुजरात के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि सरकारी जमीन पर बने मंदिरों समेत अनधिकृत निर्माणों को जमींदोज किया गया है। उल्लेखित भूमि पर धार्मिक कार्यक्रमों समेत किसी भी तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा रही।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गिर सोमनाथ जिले में ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान उच्चतम न्यायालय ने ध्वस्त की जा चुकी दरगाह पर 1 से 3 फरवरी तक उर्स आयोजित करने की अनुमति देने संबंधी याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन


गुजरात के अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि सरकारी जमीन पर बने मंदिरों समेत अनधिकृत निर्माणों को जमींदोज किया गया है। उल्लेखित भूमि पर धार्मिक कार्यक्रमों समेत किसी भी तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा रही।

सॉलिसिटर जनरल की दलील के बाद फैसला
न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया कि सरकारी जमीन पर मंदिरों समेत सभी अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है। मेहता ने कहा कि उक्त भूमि पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों समेत किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा रही, जिसपर पहले अतिक्रमण था।
विज्ञापन


आवेदक की दलील
आवेदक की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि वहां एक दरगाह थी, जिसे प्राधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि दरगाह पर ‘उर्स’ उत्सव मनाने की परंपरा पिछले कई वर्षों से जारी है और अधिकारियों ने गुरुवार को इसके लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि मुख्य मामले को सुने बिना आवेदन में किए गए अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

27 जनवरी को कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने 27 जनवरी को कहा था कि वह गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए गुजरात के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका समेत विभिन्न याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

विज्ञापन

Supreme Court - फोटो : PTI
70 वकीलों को वरिष्ठ पद दिए जाने के खिलाफ याचिका खारिज 
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 70 वकीलों को वरिष्ठ पद दिए जाने के खिलाफ याचिका की जांच करने से इनकार कर दिया। याचिका न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। पीठ की ओर से यह कहे जाने के बाद कि वह याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, याचिकाकर्ता ने इसे वापस ले लिया। याचिकाकर्ता, जो व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे, ने दावा किया कि वकीलों को हाईकोर्ट द्वारा वरिष्ठ पद दिए जाने की प्रक्रिया अनुचित है। इस याचिका में पिछले साल 29 नवंबर को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत 70 वकीलों को हाईकोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें