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SC Updates: दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील को फिर नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब

Mon, 22 Sep 2025 11:19 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कई बड़े मामलों की सुनवाई करेगा। इनमें दिल्ली दंगों से जुड़े एक्टिविस्ट्स उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत, जजों के पेंशन लाभ, दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण, तेलंगाना कैश-फॉर-वोट घोटाला और भाजपा विधायक की याचिका शामिल हैं। अदालत तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस के मामलों पर भी सुनवाई करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश मामले में आरोपियों उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा-उर-रहमान की जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई सात अक्तूबर तय की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, एएम सिंघवी और सिद्धार्थ दवे पेश हुए।
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सुप्रीम कोर्ट में कई और अहम मामलों की भी आज सुनवाई होनी है। इनमें दिल्ली दंगों से जुड़े एक्टिविस्ट्स की जमानत याचिकाओं से लेकर उच्च और निचली अदालतों के जजों के पेंशन लाभ, दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण और बड़े नेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों तक की सुनवाई शामिल है। इस कारण आज अदालत का एजेंडा बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जजों के पेंशन लाभ पर स्वत: संज्ञान मामला
अदालत निचली अदालतों और हाईकोर्ट के जजों के पेंशन लाभ तय करने से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की भी सुनवाई करेगी। इस मुद्दे पर न्यायपालिका में समानता और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा फैसला आ सकता है।
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राजनीतिक मामलों और भ्रष्टाचार के केस
तेलंगाना के कैश-फॉर-वोट घोटाले में राज्य की एसीबी की याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इसके साथ ही भाजपा विधायक की याचिका, जिसमें कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खिलाफ सीबीआई जांच की सहमति वापस लेने को चुनौती दी गई है। इस मामले पर भी अदालत सुनवाई करेगी।

दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण और निगरानी तंत्र
राजधानी और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण से संबंधित याचिका पर भी अदालत ध्यान देगी। इसके अलावा पूरे देश के थानों में सीसीटीवी लगाने के निर्देशों के अनुपालन पर दायर याचिका पर भी सुनवाई होनी है। यह मामला पुलिस तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।

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अन्य महत्वपूर्ण याचिकाएं
पूर्व तमिलनाडु मंत्री सेंथिल बालाजी ने अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में संशोधन की मांग की है। साथ ही उनकी जमानत रद्द करने की अलग याचिका भी सूचीबद्ध है। वहीं, बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने 215 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसने उनके खिलाफ दर्ज ईडी के केस को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

शीना बोरा हत्याकांड में गवाह ने कहा- शीना के लापता होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील ने उसके मंगेतर की मदद की पेशकश की, लेकिन उसने स्वीकार नहीं किया
शीना बोरा हत्याकांड मामले में एक गवाह ने शुक्रवार को निचली अदालत को बताया कि उसके लापता होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने उसके मंगेतर राहुल मुखर्जी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में मदद की पेशकश की थी, लेकिन उसने मदद स्वीकार नहीं की बोरा के स्कूल के दोस्त ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश जे.पी. दारेकर के समक्ष अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में गवाही दी। शीना बोरा (24) 24 अप्रैल, 2012 को शहर से लापता हो गई थी। उसकी मां इंद्राणी मुखर्जी पर उसकी हत्या करने और अन्य लोगों की मदद से शव को ठिकाने लगाने का आरोप है। गवाह ने दावा किया कि उसके चचेरे भाई सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने राहुल मुखर्जी को पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की स्पष्ट सलाह दी थी, लेकिन राहुल ने कभी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। गवाह ने कहा, "यह कहना सही है कि मेरे चचेरे भाई ने राहुल को मदद की पेशकश की थी, लेकिन उसने कभी मदद नहीं ली।" जबकि राहुल के अनुसार, वह पुलिस थाने गए, लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।

अपराधिक इतिहास जमानत से इन्कार का आधार नहीं होता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराधिक इतिहास जमानत देने से मना करने का आधार नहीं बन सकतीं। इस टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2021 में केरल के अलप्पुझा जिले में एसडीपीआई नेता केएस शान की हत्या के आरोपी पांच आरएसएस कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने आरोपपत्र का हवाला दिया और कहा कि 141 गवाहों से पूछताछ की जानी है और मुकदमे को समाप्त होने में कुछ समय लगेगा। पीठ ने उस स्टेटस रिपोर्ट पर भी गौर किया जिसमें अपीलकर्ताओं के विभिन्न आपराधिक इतिहास का उल्लेख था। पीठ ने कहा कि ऐसे इतिहास अपने आप में जमानत से इन्कार करने का आधार नहीं बन सकते। शीर्ष अदालत ने अभिमन्यु, अतुल, सानंद, विष्णु और धनीश की जमानत रद्द करने वाले केरल हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।

कर्ज चुकाने को लेकर पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में तीन लोग बरी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऋण विवाद को लेकर एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में तीन लोगों को बरी कर दिया। पीठ ने कहा कि सबूत अधूरे हैं और गवाह पूरी तरह से अविश्वसनीय हैं। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अपराध का उद्देश्य और उद्देश्य बिल्कुल भी साबित नहीं हुआ है और ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है जिससे आरोपी को दोषी ठहराया जा सके। पीठ ने कहा कि तीनों में एक अन्य पुलिस अधिकारी की पत्नी, उसका भाई और साला भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के दो गवाह, जो कथित तौर पर चश्मदीद गवाह थे, पूरी तरह से मुकर गए। कोर्ट ने कहा कि हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उच्च न्यायालय और निचली अदालत ने यह टिप्पणी कैसे की कि यद्यपि उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया था, फिर भी उनके साक्ष्य में आरोपियों की दोषीता की ओर इशारा करने वाली विश्वसनीय सामग्री मौजूद थी, जिस पर भरोसा किया जा सकता था। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फरवरी 2013 के आदेश को चुनौती देने वाली तीन आरोपियों द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया।
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नीलामी नोटिस छपने के बाद उधार लेने वाला संपत्ति को छुड़ा नहीं सकता
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम (सरफेसी एक्ट), 2002 के तहत नीलामी नोटिस के प्रकाशन के बाद उधारलेने वाला संपत्ति को छुड़ा नहीं सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरफेसी कानून के तहत कर्ज देने वाले बैंक और वित्तीय संस्थाओं की ओर से बिक्री प्रमाणपत्र जारी किए जाने के बाद खरीदार का संपत्ति पर पूर्ण अधिकार हो जाता है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि सरफेसी अधिनियम बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। लेकिन, पीठ ने इस तथ्य पर खेद जताया कि अधिनियम की धारा 13(8) और कुछ नियमों में अस्पष्टता के कारण मुकदमेबाजी लंबी चल रही। पीठ ने कहा कि 2016 में धारा 13(8) में संशोधन किया गया, जिसके जरिये नीलामी नोटिस के प्रकाशन के बाद संपत्ति को छुड़ाने के उधारलेने वाले के अधिकार को खत्म कर दिया गया था। पीठ ने कहा कि यह संशोधन लागू होने से पहले लिए गए कर्ज पर भी लागू होगा, अगर उधार अदायगी में चूक 1 सितंबर, 2016 के बाद हुई हो।

जस्टिस पारदीवाला ने 140 पृष्ठों का फैसला लिखते हुए कहा, हम वित्त मंत्रालय से विनम्रतापूर्वक आग्रह करते हैं कि वह इन प्रावधानों पर गंभीरता से विचार करे और आवश्यक बदलाव लाए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। पीठ ने आगे कहा कि सरफेसी अधिनियम को लागू हुए लगभग तेईस साल हो गए हैं। यह देखना वाकई बहुत दुखद है कि इतने वर्षों बाद भी, इस मामले से जुड़े प्रक्रियागत मुद्दे, इस कानून को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने इस अधिनियम के तहत नीलामी में संपत्ति खरीदारों के अधिकारों को सुदृढ़ करते हुए, एम राजेंद्रन एवं अन्य की अपील को स्वीकार कर लिया।
अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मेसर्स केपीके ऑयल्स एंड प्रोटीन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की बंधक संपत्ति की नीलामी को रद्द कर दिया गया था।
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