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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सीपीसीबी दिवाली से पहले पटाखों के शोर की सीमा और ढील पर विचार करे

Thu, 20 Aug 2026 08:31 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से आगामी दिवाली पर्व के सीजन को देखते हुए पटाखों के शोर की तय सीमा (ध्वनि सीमा) और कुछ श्रेणियों के पटाखों पर आंशिक ढील दिए जाने की संभावना पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले पर एन वक्त पर जल्दबाजी करने के बजाय पहले ही विचार किया जाना चाहिए। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में हवा के अधिक प्रदूषित होने के दौरान पटाखे जलाने पर लगी पाबंदियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। पीठ ने सीपीसीबी के वकील से कहा कि कृपया कुछ छूट दें। हम दिवाली से ठीक पहले इसमें जल्दबाजी नहीं करना चाहते। शीर्ष अदालत ने 22 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा था कि वे सीपीसीबी से इस बारे में निर्देश लें कि क्या शोर से जुड़ी पाबंदियों में कुछ छूट देकर खास तरह के पटाखों की इजाजत दी जा सकती है।

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बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और सीपीसीबी की ओर से पेश भाटी ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया। पीठ ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया, लेकिन फिर से कहा कि सीपीसीबी को त्योहार से पहले शोर की तय सीमा में कुछ ढील देने की संभावना पर विचार करना चाहिए। कुछ पटाखा विक्रेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जेसाई दीपक ने कहा कि मौजूदा स्थिति के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है और उनके क्लाइंट का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। कम से कम लाइसेंस तो बहाल कर दिया जाए, ताकि अगर कोर्ट मैन्युफैक्चरिंग की इजाजत देने का फैसला करे तो लाइसेंस हो।

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हाईकोर्ट के फैसले को तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने पूर्व सहयोगी से दुष्कर्म के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, 18 अगस्त को गोवा सरकार ने भी इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से तेजपाल को मिली सजा बढ़ाने की मांग की थी। यह मामला साल 2013 का है। तरुण तेजपाल पर आरोप था कि उन्होंने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। शिकायत के बाद गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। लेकिन गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद 18 अगस्त को गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सरकार का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की सजा पर्याप्त नहीं है। दोषी को और कड़ा दंड मिलना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ तरुण तेजपाल ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले और 10 साल की सजा को चुनौती दी है। अब सुप्रीम कोर्ट में एक तरफ दोषी सजा कम करने की मांग करेगा और दूसरी तरफ राज्य सरकार सजा बढ़ाने की मांग करेगी।

 

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