जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ के दौरान वकील की उपस्थिति की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ के दौरान किसी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति की अनुमति देने के निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका वकील शफी माथेर ने दायर की है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि जनहित में पूछताछ के दौरान एक वकील की आवश्यकता होती है ताकि व्यक्ति को यह बताया जा सके कि वह प्रश्न दोषपूर्ण है या नहीं। पीठ ने कहा कि न्यायालय के संदर्भ के लिए कुछ उदाहरणों का हवाला दिया जाए। गुरुस्वामी ने इसके बाद नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टॉर्चर द्वारा प्रकाशित 'भारत: टॉर्चर पर वार्षिक रिपोर्ट 2019' का उल्लेख किया, जिसमें 2019 के दौरान भारत में यातना और दंड के शीर्ष 15 रुझानों का विवरण दिया गया है। जिसके बाद पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करने का फैसला किया।