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Supreme Court: 'कुष्ठ रोग पीड़ितों से भेदभाव वाले कानूनी प्रावधानों में बदलाव करें', कोर्ट ने राज्यों से कहा

Wed, 30 Jul 2025 10:31 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सभी राज्य एक दिन का विशेष विधानसभा सत्र बुलाएं या अध्यादेश लाकर उन कानूनों में बदलाव करें, जिनमें कुष्ठ रोग के पीड़ितों के खिलाफ अपमानजनक, भेदभावपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य अगर ऐसे अपमानजनक और भेदभावपूर्ण कानूनों को हटा दें तो इन लोगों के कल्याण के लिए यह बहुत बड़ा कार्य होगा। 
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पीठ ने कहा, राज्य सरकारें नियमित मानसून या शीतकालीन सत्र का इंतजार करने के बजाय विशेष या एक दिवसीय सत्र बुलाकर कुष्ट रोग के पीड़ितों के खिलाफ कानून में भेदभावपूर्ण प्रावधानों को हटा या संशोधित कर सकती हैं। अगर सत्र बुलाना संभव न हो, तो अध्यादेश लाया जा सकता है। ऐसा करके राज्य सरकारें इन लोगों के लिए बहुत बड़ा कार्य करेंगी।

शीर्ष कोर्ट उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक 2010 में दायर की गई थी। इस पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे एक समिति बनाएं जो ऐसे कानूनों की पहचान करे जो कुष्ट के पीड़ितों या ठीक हो चुके लोगों के खिलाफ भेदभाव करते हैं और उन्हें हटाने के उपाय करें ताकि वे संविधान के अनुरूप हों। पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि ऐसे लगभग 145 से अधिक राज्य कानून हो सकते हैं जिनमें आपत्तिजनक प्रावधान अब भी मौजूद हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2023 का कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2023 के उस कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के इस रुख को सही ठहराया गया था कि किसी शिक्षक की सेवानिवृत्ति की उम्र इसलिए नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि उसने राज्य के किसी विश्वविद्यालय में लगातार 10 साल तक नहीं पढ़ाया है। 

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को इस आधार पर अलग करना कि उसने पढ़ाने का अनुभव पश्चिम बंगाल में लिया है या बाहर, वह भी तब जब वह सेवानिवृत्त होने वाला हो और वर्षों से काम कर रहा हो, यह अनुचित है और इसका कोई ठीक कारण नहीं है। जस्टिस पी. एस. नरसिंहा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि फरवरी 2021 के उस सरकारी आदेश (नोटिफिकेशन) का मकसद, जिसमें सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 साल की गई थी, यह नहीं था कि पश्चिम बंगाल के बाहर के विश्वविद्यालयों से अनुभव रखने वालों को बाहर रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि नोटिफिकेशन की भाषा, संदर्भ और उद्देश्य यह स्पष्ट करते हैं कि इसका मकसद सिर्फ राज्य सहायता प्राप्त और निजी संस्थानों के बीच अंतर करना था।
 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया-  75,629 एकड़ रक्षा भूमि में से 2,024 एकड़ पर है लोगों का अवैध कब्जा
केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश में 75,629 एकड़ रक्षा भूमि में से 2,024 एकड़ भूमि पर वर्तमान में लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। 1,575 एकड़ भूमि उन लोगों के कब्जे में है, जिन्होंने कृषि उद्देश्यों के लिए भूमि पट्टे पर ली थी।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि स्थिति रिपोर्ट दायर की गई है और अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से कब्जे हटाने के लिए उठाए गए कदमों की निगरानी के लिए एक नई समिति गठित किए जाने की जानकारी मिलने के बाद, अदालत ने नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो महीने का समय दिया।

रक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 819 एकड़ भूमि राज्य और केंद्र सरकार के विभागों या उनके उपक्रमों के कब्जे में है, जिनका उपयोग विभिन्न जनोपयोगी उद्देश्यों, जैसे सड़कें बनाना, स्कूल, सार्वजनिक पार्क और बस स्टैंड बनाना, और प्रशासनिक कारणों से किया जा रहा है। हलफनामे में कहा गया है, रक्षा संपदा संगठन के प्रशासनिक दायरे में लगभग 75,629 एकड़ रक्षा भूमि आती है, जो मुख्य रूप से वर्ग ए-2, बी-3, बी-4 और सी की भूमि है। इस भूमि में से लगभग 52,899 एकड़ भूमि छावनी के भीतर है, जबकि 22,730 एकड़ भूमि छावनी के बाहर स्थित है। लगभग 2,024 एकड़ भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। यह हलफनामा एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से 2014 में दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) में दायर किया गया था, जिसमें देश भर में रक्षा भूमि पर कथित अतिक्रमण की जांच की मांग की गई थी। इसमें यह भी कहा गया है कि 1,575 एकड़ जमीन पूर्व कृषि पट्टेदारों के अवैध कब्जे में है, जिनके खिलाफ संबंधित डीईओ की ओर से बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई है।

 सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी से जुड़े घूस लेकर नौकरी देने के मामले में 2000 से अधिक लोगो को फंसाने के लिए तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए क्रिकेट स्टेडियम की आवश्यकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार से सभी अभियुक्तों और गवाहों का ब्योरा भी मांगा।


 


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने पर चल रही सुनवाई को टालने से इनकार कर दिया। 



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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर पर प्रतिबंध रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व रणजी ट्रॉफी क्रिकेटर संतोष करुणाकरण पर केरल क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को रद्द कर दिया और मामले की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के 2021 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसने करुणाकरण की याचिका को खारिज कर दिया था और केसीए के क्रिकेटर को काली सूची में डालने के फैसले को बरकरार रखा था।
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