आदिवासी संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकारों से FRA का बचाव करने का किया आह्वान
100 से अधिक आदिवासी और वनवासी अधिकार संगठनों ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाएं और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का कोर्ट में बचाव करें। यह अपील सुप्रीम कोर्ट के 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई से पहले की गई है, जिसमें 'वाइल्डलाइफ फर्स्ट एंड ऑर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' मामले की सुनवाई की जाएगी। इस मामले में 2006 में बने FRA की संवैधानिकता को चुनौती दी जा रही है, जो पारंपरिक वनवासी समुदायों, खासकर आदिवासी लोगों के अधिकारों को मान्यता देता है।
इन संगठनों ने एक खुले पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद लाखों आदिवासी और वनवासी लोगों को बेदखली का सामना करना पड़ सकता है, जिनके अधिकारों को गलत तरीके से नकारा गया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे भारत के आदिवासियों और वनवासियों के अधिकारों की रक्षा करें और इन लोगों के खिलाफ कोई अवैध कदम उठाने से बचें।