गोवा सरकार ने पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म मामले में मिली 10 साल की सजा बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया था और उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
राज्य सरकार का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की ओर से दी गई 10 साल की सजा पर्याप्त नहीं है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर दोषी को इससे अधिक कठोर दंड देने की मांग की है। 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें 10 साल के कठोर कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंदेकर की खंडपीठ ने कहा था कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि मामले में मौजूद महत्वपूर्ण सबूतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था।
यह मामला 2013 का है। तरुण तेजपाल पर गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। शिकायत के बाद गोवा पुलिस ने उनके खिलाफ दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। नवंबर 2013 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- फटकारने से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी की फटकार, अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रतिकूल टिप्पणी या सख्त व्यवहार मात्र से अधीनस्थ की आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी की ऐसी मंशा थी कि वह अधीनस्थ को आत्महत्या के लिए प्रेरित या मजबूर करे और आत्महत्या से पहले कोई उकसावे वाला कम किया हो। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा व जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एक वन अधिकारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ व ट्रायल कोर्ट के आदेश रद्द कर दिए। मामला एक महिला वन रेंज अधिकारी की आत्महत्या से जुड़ा था। उन्होंने तीन सुसाइड नोट छोड़े थे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 306 के तहत अभियोजन के लिए धारा 107 में परिभाषित उकसावे के तत्व साबित होना जरूरी है।