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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: बंगाल उपचुनाव से पहले सुनवाई की मांग खारिज, शीर्ष अदालत में पांच अक्तूबर को होगी सुनवाई

Mon, 28 Sep 2026 10:13 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अक्तूबर को तय की है। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर 6 अक्तूबर को उपचुनाव होने हैं।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से जल्द तारीख देने की मांग की गई थी, क्योंकि एसआईआर से जुड़े कई मामले अभी लंबित हैं।

18 हजार से अधिक अपीलें लंबित होने का दावा
वकील ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 18 हजार से अधिक अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने लंबित हैं। उनका कहना था कि इन मतदाताओं ने पिछले चुनाव में भी मतदान नहीं किया था और अगर मामलों का निपटारा नहीं हुआ तो वे दोबारा अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। वकील ने 6 अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव का हवाला देते हुए 5 अक्तूबर से पहले सुनवाई की मांग की। हालांकि, पीठ ने मामले को 5 अक्तूबर को ही सुनने की बात कही।
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6 अक्तूबर को रेजीनगर और नंदीग्राम में उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर 6 अक्तूबर को उपचुनाव होने हैं। ऐसे में SIR के तहत मतदाता सूची से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई की तारीख को लेकर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस दौरान कहा कि मामला 5 अक्तूबर को ही सुना जाएगा। अदालत की टिप्पणी के बाद तत्काल सुनवाई की मांग पर विराम लग गया।
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यौन अपराधों की खबरों में संयम बरतें मीडिया: सुप्रीम कोर्ट बोला- सनसनीखेज भाषा से पीड़ितों को पहुंच सकता है गहरा आघात
सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को महत्वपूर्ण सलाह दी है। अदालत ने कहा कि प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया को ऐसी खबरों में जिम्मेदार, संवेदनशील और संयमित पत्रकारिता करनी चाहिए।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि सनसनीखेज हेडलाइन, यौन हिंसा का जरूरत से ज्यादा विवरण और असंवेदनशील भाषा किसी जनहित की सेवा नहीं करती। इससे पीड़ित और उनके परिवार को दोबारा मानसिक आघात पहुंच सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को यह भी याद दिलाया कि बीएनएस की धारा 72 और पोक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत यौन अपराध की पीड़िता या नाबालिग की पहचान सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करना प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि खबरों में सनसनी के बजाय पीड़ित की गरिमा, तथ्य और न्याय पर ध्यान होना चाहिए। साथ ही मीडिया से लोगों को खतरे की स्थिति में मदद के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देने को भी कहा।

नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए दिया चार हफ्ते का समय
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित अस्थियों को जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर से भारत लाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

यह याचिका नेताजी की बेटी अनिता बी. फाफ ने दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 11 अगस्त को केंद्र को नोटिस जारी किया था। सोमवार को केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने एक हस्तक्षेपकर्ता की दलील का विरोध किया। वह याचिका पर सवाल उठा रहा था और कह रहा था कि रिकॉर्ड में यह साबित नहीं होता कि फाफ नेताजी की बेटी हैं। नेताजी के अगस्त 1945 में गायब होने को लेकर लंबे समय से कई तरह के दावे और सिद्धांत सामने आते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि उनकी अस्थियां रेंकोजी मंदिर में रखी हैं।
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