बीरेन सिंह की मणिपुर हिंसा में भूमिका संबंधी ऑडियो की जांच रिपोर्ट तैयार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा मामले में कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की संलिप्तता संबंधी लीक ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता पर फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार है। इसे जल्द ही सीलबंद लिफाफे में दाखिल कर दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों के वकीलों की दलीलों का संज्ञान लिया और ‘कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट’ (केओएचयूआर) की याचिका की सुनवाई पांच मई को शुरू हो रहे सप्ताह में किए जाने के लिए स्थगित कर दी। वकील ने कहा कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की रिपोर्ट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दाखिल करेंगे। उन्होंने यह कहते हुए स्थगन की मांग की कि विधि अधिकारी मेहता इस समय उपलब्ध नहीं हैं। मणिपुर में बिगड़े हालात और नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती मांगों के बीच बीरेन सिंह ने नौ फरवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लीक ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता पर सीएफएसएल से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। इसमें मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में सिंह की संलिप्तता का आरोप लगा था। केओएचयूआर की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सिंह की कथित भूमिका की अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की थी। सीजेआई ने कहा था कि राज्य धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है और हम इस मामले को फिलहाल स्थगित रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह बाद में देखेंगे कि मामले की सुनवाई शीर्ष अदालत करेगी या हाईकोर्ट। सॉलिसिटर जनरल ने टिप्पणियों से सहमति जताई थी।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बृहस्पतिवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल बनाने का निर्देश दिया ताकि पीड़ितों को तत्काल सहायता मिल सके। शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल बनाने के लिए छह महीने का समय दिया।
जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को चालकों के लिए काम करने के निर्धारित घंटों की व्यवस्था लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित विभागों की बैठकें बुलाने का निर्देश भी दिया। यह आदेश अधिवक्ता किशन चंद जैन की ओर से दायर एक याचिका पर दिया गया, जिसमें आग्रह किया गया था कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक प्रोटोकॉल होना चाहिए।
पीठ ने कहा, हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे मामले भी हैं जहां सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तुरंत मदद नहीं मिल पाती। ऐसे भी मामले हैं जहां पीड़ितों को चोट तो नहीं लगती लेकिन वे वाहनों में फंस जाते हैं। हमारा मानना है कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमीनी स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।