जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
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सीजेआई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में छह सदस्यीय कॉलेजियम की हुई बैठक
बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जज दीपांकर दत्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर सोमवार को शपथ लेने के बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में छह सदस्यीय कॉलेजियम ने मंगलवार को पहली बार बैठक की। बैठक के दौरान, कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट में स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की।
सूत्रों ने कहा कि शीर्ष अदालत परिसर में करीब दो घंटे तक चली कॉलेजियम की बैठक में कई नामों पर विचार-विमर्श किया गया। उच्च न्यायालयों के लिए न्यायाधीशों के नाम तय करने वाले शीर्ष तीन न्यायाधीशों वाले कॉलेजियम ने केंद्र को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति संजय मिश्रा के नाम की सिफारिश की है। वहीं, कॉलेजियम ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह और बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस के विनोद चंद्रन को गुवाहाटी हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश का प्रस्ताव दिया है।
गौरतलब है कि सोमवार को न्यायमूर्ति दत्ता के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष अदालत में छह रिक्तियों को छोड़कर न्यायाधीशों की कुल संख्या 28 हो गई है। हालांकि वर्तमान में 28 न्यायाधीशों में से नौ 2023 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अगले साल जनवरी की शुरुआत में न्यायमूर्ति नजीर की सेवानिवृत्ति के साथ न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी छह सदस्यीय कॉलेजियम का हिस्सा बन जाएंगे।
असम नागरिकता कानून के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को दिया अपने अपने मुद्दे तय करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने असम नागरिकता कानून के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सभी वकीलों से उनके अपने अपने मुद्दों जिन पर वे पैरवी करेंगे तय करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत अब 10 जनवरी को इस मामले में सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में असम में अवैध अप्रवासियों से जुड़े नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इन याचिकाओं को अलग अलग श्रेणीबद्ध करने की जरूरत है और हर मामले पर अलग अलग सुनवाई होनी चाहिए। सिब्बल ने कहा, हम इसे हल कर लेंगे कि मामलों को कैसे अलग किया जाए। हम सब साथ बैठकर इसका समाधान निकालेंगे। पीठ शीत कालीन छुट्टियों के बाद इसे सुनें। सिब्बल की दलील से सहमति जताते हुए पीठ ने सभी वकीलों को उनके पैरवी वाले मामलों को अलग करने का निर्देश दिया और सुनवाई के लिए मापदंड निर्धारित करने के संबंध में निर्देश जारी करने के लिए अगले साल 10 जनवरी की तारीख तय कर दी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर दायर याचिका के पूरे सेट की स्कैन की हुई सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
SC ने कोटा के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
देश में आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। सुनवाई से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने याचिका को कानून की ''प्रक्रिया का दुरुपयोग'' बताया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जो कि एलएलएम की छात्रा शिवानी पंवार है वह अपनी याचिका वापस ले। पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस नहीं ली तो वह जुर्माना लगाएगी।