शीर्ष अदालत ने 25 सितंबर को राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन से जवाब मांगा था। राजोआना को 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट मामले में दोषी पाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के सचिव को बेअंत हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि राजोआना की दया याचिका पर आज से दो सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। दरअसल, मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सचिव को निर्देश दिया कि वह 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाले बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका को राष्ट्रपति के सामने विचार के लिए रखें। न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने राष्ट्रपति से दो सप्ताह के भीतर याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया।
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पीठ ने जताई नाराजगी
पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष रूप से आज का दिन तय किए जाने के बावजूद भारत संघ की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। पीठ केवल इसी मामले की सुनवाई के लिए बैठी थी। सुनवाई की इससे पहले की तारीख में मामले को स्थगित कर दिया गया था, ताकि केंद्र सरकार राष्ट्रपति कार्यालय से यह निर्देश ले सके कि दया याचिका पर कब तक निर्णय लिया जाएगा।
मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को
कोर्ट ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता मृत्युदंड का सामना कर रहा है, हम भारत के राष्ट्रपति के सचिव को निर्देश देते हैं कि वह मामले को राष्ट्रपति के समक्ष रखें और उनसे अनुरोध करें कि वह आज से दो सप्ताह के भीतर इस पर विचार करें। मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी।
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जुलाई 2007 में मौत की सजा सुनाई गई थी
इससे पहले शीर्ष अदालत ने 25 सितंबर को राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन से जवाब मांगा था। राजोआना को 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट मामले में दोषी पाया गया था। इस घटना में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह तथा 16 अन्य लोग मारे गए थे। विशेष अदालत ने राजोआना को जुलाई, 2007 में मौत की सजा सुनाई थी।
मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था
राजोआना ने अपनी याचिका में कहा है कि मार्च 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उसकी ओर से क्षमादान का अनुरोध करते हुए संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत एक दया याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल तीन मई को राजोआना को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मणिपुर हाईकोर्ट के लिए की नाम की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत न्यायमूर्ति डी कृष्णकुमार को मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले और न्यायमूर्ति बीआर गवई और सूर्यकांत की मौजूदगी वाले कॉलेजियम ने सोमवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया। 21 नवंबर, 2024 को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की सेवानिवृत्ति के परिणामस्वरूप मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर एक रिक्ति उत्पन्न होगी। इसलिए उस पद पर नियुक्ति की जानी आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के मामले की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत हर चीज का समाधान नहीं है। सरकार चलाना अदालत का काम नहीं है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि याचिका में उन नेताओं के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक और गैरजिम्मेदाराना आरोप लगाए गए हैं जो अब जीवित नहीं हैं।
मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने दिल्ली रिज में पेड़ों की कटाई से संबंधित याचिका से खुद को अलग किया
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने दिल्ली रिज क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। मामले में तत्कालीन और सेवानिवृत्त हो चुके सीजेआई चंद्रचूड़ ने मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से हलफनामा मांगा था। मामले में सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि जब मैं नालसा का अध्यक्ष था तो मैं पटना गया था। वहां मैंने दिल्ली के उप राज्यपाल के साथ जेलों का दौरा किया था। इसलिए मैं याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता। उन्होंने याचिका को 27 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में उस पीठ के सामने सूचीबद्ध करने के लिए कहा, जिसके सीजेआई सदस्य नहीं है।
बिहार में पुल ढहने की घटनाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पुल ढहने की घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने वकील ब्रजेश सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से भी जवाब मांगा। इस पर पीठ ने कहा कि बिहार सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। यह आखिरी मौका है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को अधिकारियों के जवाब दाखिल करने के चार सप्ताह बाद अपना जवाब दाखिल करना होगा। पीठ ने अब याचिका को 15 फरवरी, 2025 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इससे पहले इस साल 29 जुलाई को जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) सहित अन्य से जवाब मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने महिला जजों की संख्या पर सवाल उठाने पर एक वकील को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) में महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। मामले में एक वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पूछ रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय में कितनी महिला न्यायाधीश हैं? इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अगर आपको ये सब बातें कहकर दर्शकों को खुश करना है, तो कृपया ऐसा करें। इसे 10 बार कहें। आप आग में घी डाल रहे हैं। अदालत के साथ खिलवाड़ नहीं करें। बस बहुत हो गया। पीठ ने बार कोई और स्पष्टीकरण सुनने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि हम कुछ नहीं सुनेंगे। अब हम इस मामले के व्यापक मुद्दों पर विचार करेंगे और अंतिम रूप से इस मुद्दे पर निर्णय लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों को दी मास्क पहनने की सलाह
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने कर्मचारियों को मास्क पहनने के निर्देश जारी किए। सहायक रजिस्ट्रार द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रैप 4 लागू है। इसलिए सभी को मास्क पहनने और स्वास्थ्य उपाय करने की सलाह दी जाती है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार को और भी खराब हो गई। द्वारका, मुंडका और नजफगढ़ जैसे इलाकों में दोपहर में अधिकतम एक्यूआई 500 दर्ज किया गया।
पंजाब में तीन हजार पंचायत उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन पर सुप्रीम कोर्ट हैरान
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में तीन हजार पंचायत सदस्यों के निर्विरोध निर्वाचन पर हैरानी जताई। कोर्ट ने इसे विचित्र बताया और असंतुष्ट उम्मीदवारों को याचिका दायर करने की अनुमति दी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कई उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज करने और चुनावी अनियमितता का आरोप लगाने संबंधी याचिका पर पहले नोटिस जारी किए थे। पीठ ने कहा कि पीड़ित निर्वाचन आयोग के समक्ष चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं और आयोग को छह महीने में उन पर फैसला करना होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए या फाड़ दिए गए, वे भी अपनी शिकायतें लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि उनकी याचिकाओं को सीमा अवधि के उल्लंघन के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाओं को गुण-दोष के आधार पर निपटाया जाए।