सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत (फाइल)
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यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत नाराज हो गए। दरअसल याचिका दायर करने वाले वकील ने कहा कि यूजीसी नियम न्यायाधिकार क्षेत्र के तहत नहीं आते। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए सीजेआई ने कहा, ये याचिका क्यों दायर की गई है? ये अब ज्यादा हो रहा है। ये सब मीडिया की सुर्खियां पाने के लिए किया जा रहा है। वरना आप यूट्यूब पर कैसे आएंगे। अन्य याचिकाओं की तुलना में इसमें क्या अलग है?
सुप्रीम कोर्ट पहले ही यूजीपी नियमों को लागू करने पर लगा चुका है अंतरिम रोक
- बुधवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने ये टिप्पणी की। गौरतलब है कि यूजीसी नियमों के खिलाफ पहले भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं। जनवरी में ही सुप्रीम कोर्ट यूजीसी के नियमों पर अंतरिम रोक लगा चुका है। यूजीसी नियमों पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'ये नियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है'।
- सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि विशेषज्ञों की एक समिति इन नियमों की खामियों को दूर करने पर विचार कर सकती है।
- जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने ही यूजीसी नियमों को लागू करने पर अंतरिम रोक लगाई थी और ये भी माना था कि ये नियम समाज में विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
- गौरतलब है कि यूजीसी नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया कि यूजीसी ने जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को सीमित और गैर समावेशी रखा है। आलोचकों का कहना है कि यूजीसी नियमों में भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक ही सीमित कर दिया गया है।
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बढ़ती जनहित याचिकाओं पर सीजेआई ने जताई नाराजगी
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ही सीजेाई सूर्यकांत ने जनहित याचिकाओं यानी पीआईएल की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के वक्त उन्होंने कहा कि आजकल कई लोगों का मकसद सिर्फ याचिका दाखिल करना रह गया है। ऐसा लगता है कि वे सुबह अखबार पढ़ते हैं और शाम तक कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर देते हैं। सीजेआई ने कहा कि कुछ लोगों का यह एजेंडा बन गया है। हम देख रहे हैं कि पीआईएल की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।