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सुप्रीम कोर्ट ने लिया शाहीन बाग में नवजात की मौत का संज्ञान

Fri, 07 Feb 2020 10:26 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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shaheen bagh - फोटो : पीटीआई
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राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग में चल रहे धरने के दौरान चार माह के नवजात बच्चे की मौत का सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्वत: संज्ञान लिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद मुंबई की वीरता पुरस्कार विजेता बच्ची द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ प्रदर्शनों में बच्चों और नवजातों की भागीदारी रोकने के मसले पर सोमवार को सुनवाई करेगी।

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शाहीन बाग में सीएए-एनआरसी के विरोध में 54 दिन से कड़ाके की ठंड के बीच जारी धरना-प्रदर्शन में शामिल एक दंपती के चार महीने के बच्चे की 30 जनवरी को मौत हो गई थी। कथित तौर पर बच्चे की मौत की वजह ठंड लगने के कारण बताई गई थी। इसके बाद 12 वर्षीया जेन गुनरतन सदावरते ने मुंबई से चीफ जस्टिस बोबडे को पत्र लिखकर भेजा था। 

वीरता पुरस्कार विजेता 12 वर्षीया बच्ची के पत्र पर लिया संज्ञान
2019 के भारतीय बाल विकास कल्याण परिषद राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार की विजेता जेन ने पत्र में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को धरना-प्रदर्शन में नवजात शिशुओं व बच्चों को शामिल करने पर रोक लगाने के लिए निर्देश देना चाहिए। नवजात शिशुओं व बच्चों को धरना-प्रदर्शन में शामिल करना क्रूरता व प्रताड़ना के समान है। शाहीन बाग में चार महीने के बच्चे की मौत को जेन ने संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन जीने का अधिकार) का उल्लंघन करार दिया है। 
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उसने आरोप लगाया था कि शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन के आयोजकों व नवजात के माता-पिता उसके अधिकार का संरक्षण करने में नाकामयाब रहे। पत्र में कक्षा-7 की छात्रा जेन ने कहा था कि शाहीन बाग में जारी धरना-प्रदर्शन में महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, नवजात शिशु व बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन नवजात के लिए उचित देखभाल बेहद आवश्यक है, क्योंकि वे अपनी परेशानी को व्यक्त नहीं कर सकते। 

इस बात को भी नजरअंदाज किया जा रहा है कि यह उनके लिए अनुकूल वातावरण नहीं है। नवजात शिशुओं व बच्चों को प्रदर्शन स्थल पर लाना बाल अधिकार और प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है। उसने इस पर भी आश्चर्य जताया कि 4 महीने के नवजात शिशु के मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत का कारण नहीं लिखा गया है। उसने शीर्ष अदालत से नवजात की मौत की जांच कराने की गुहार की है। 

पत्र में यह भी कहा गया था कि पुलिस ने प्रदर्शन में बच्चों को शामिल करने से रोकने का प्रयास नहीं किया। जेन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार की है कि अधिकारियों को प्रदर्शन में बच्चों को शामिल होने से रोकने का निर्देश दिया जाए।

17 लोगों की जान बचाने पर मिला था पुरस्कार
चीफ जस्टिस को पत्र लिखने वाली जेन को 17 लोगों की जान बचाने के लिए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा गया था। उसने मुंबई के परेल इलाके में क्रिस्टल टावर में लगी आग के दौरान 17 लोगों को सुरक्षित रास्ता दिखाकर बाहर निकाला था और उनकी जान बचाई थी।

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