जोशीमठ भू-धंसाव मामले में याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्पक्षेप की मांग की है। याचिकाकर्ता ने अपील की है कि मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है और इस संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार (10 जनवरी) को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
दरअसल, जोशीमठ मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से याचिका दायर की गई थी। सोमवार को याचिकाकर्ता के वकील ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद मंगलवार को फिर से याचिका उल्लेख करें।
याचिका में दावा किया गया है कि यह जोशीमठ में भू-धंसाव बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के कारण हुआ है और उन्होंने उत्तराखंड के लोगों को तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजे की मांग की है।
एल्गार परिषद ममाले में गौतम नवलखा की नजरबंदी का आदेश 17 फरवरी तक बढ़ा
एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में नवंबर से नजरबंद सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को आज भी सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने नवलखा पर अपने अंतरिम आदेश को 17 फरवरी तक बढ़ा दिया। दरअसल, शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर को आदेश दिया था कि नवलखा को 24 घंटे के भीतर नजरबंद कर दिया जाए और उस इमारत में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने का आदेश दिया जहां कार्यकर्ता को नजरबंद रखा जाएगा। वहीं, जसलोक अस्पताल द्वारा जारी की गई नवलखा की मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित उपचार दिया गया था और तलोजा सेंट्रल जेल के परिसर में उनकी स्थिति ठीक थी।
सु्प्रीम कोर्ट
- फोटो : SELF
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। दरअसल, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), 2014 के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका की विचारणीयता पर पश्चिम बंगाल सरकार की प्रारंभिक आपत्ति को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया था। जिसके बाद सरकार ने उस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीईटी 2014 में 42,897 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, लेकिन लिखित परीक्षा या साक्षात्कार में प्राप्त अंकों का खुलासा करने वाली कोई मेरिट सूची प्रकाशित नहीं की गई थी। इसके साथ ही कोई आरक्षित श्रेणी-वार सूची भी प्रकाशित नहीं की गई थी।
इस याचिका पर न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के पिछले साल 12 जुलाई के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर विचार नहीं करेगी।
उच्च न्यायालय के समक्ष, राज्य ने इस आधार पर याचिका की विचारणीयता पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई थी कि यह मामला 2016-17 की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है और जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल करने में देरी हुई थी।
बाघों का संरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
बाघ संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यानों के मुख्य बाघ निवास क्षेत्रों को अक्षुण्ण रखा जाएगा। धामी सरकार ने उत्तराखंड में टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र के भीतर एक निजी ऑपरेटर की बसों को चलाने की अनुमति देने वाले जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के फैसले पर दाखिल एक याचिका पर शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में यह बात कही।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य इस मामले में अपना जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर रखना चाहता है।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का निर्णय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम का उल्लंघन है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने इस मामले को छह सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इस दौरान पीठ ने कहा कि जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक द्वारा जारी 23 दिसंबर, 2020 कार्यालय पत्र के कार्यान्वयन पर रोक लगाने वाला उसका 18 फरवरी, 2021 का आदेश जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
पूजा स्थल अधिनियम के खिलाफ याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को दिया समय
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को 15 अगस्त, 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थलों के चरित्र को बनाए रखने वाले 1991 के पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर जवाब दाखिल करने के लिए फरवरी के अंत तक और समय दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर केंद्र को समय दिया। मेहता ने कहा कि अदालत मामले में सुनवाई की तारीख तय कर सकती है और केंद्र तब तक अपना जवाब दाखिल करेगा। शीर्ष अदालत ने 12 मार्च, 2021 को पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वाली वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय और अन्य की याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
SC/ST Act
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति वाले आईपीएस की सहमति पर कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या किसी राज्य में पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्ति से पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति वाले किसी आईपीएस अधिकारी की सहमति आवश्यक है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मंत्रालय से एक हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। पीठ ने यह भी कहा है कि अगर सहमति आवश्यक है तो किस नियम के तहत इसका भी उल्लेख किया जाए।
शीर्ष अदालत 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी टीजे लोंगकुमेर को नगालैंड के डीजीपी की नियुक्ति पर अपने पहले के निर्देशों को लागू करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले लोंगकुमेर ने इस महीने की शुरुआत में इस्तीफा दे दिया था। नगालैंड लॉ स्टूडेंट फेडरेशन ने यह याचिका दायर की थी, जिसमें लोंगकुमेर को उनके सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सेवा विस्तार के आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी।
गौतम नवलखा
नवलखा की नजरबंदी 17 फरवरी तक बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने एलगार परिषद मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की घर पर नजरबंदी को 17 फरवरी तक बढ़ा दिया। नवलखा पर माओवादियों और पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई से संबंधों का भी आरोप है। जस्टिस केएम जोसेफ एवं जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के मौजूद नहीं होने के कारण मामले को स्थगित कर दिया। संछिप्त सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नवलखा की घर पर नजरबंदी ठीक चल रही है। नवलखा की वकील नित्या रामकृष्णन ने पीठ को बताया कि नवलखा की बेटी विदेश में रहती है और उससे फोन पर बात कराने की अनुमति मांगी। रामकृष्णन ने कहा, वह अंतरराष्ट्रीय कॉल नहीं कर सकते। हम उनकी बेटी से बात कराने के लिए आवेदन देने वाले थे। लेकिन अब जब हम सब यहीं हैं, मैं एनआईए को इसकी जानकारी दे दूंगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 18 नवंबर को नवलखा को मुंबई स्थित एक घर में नजरबंद करने की इजाजत दी थी। उसके बाद से नवलखा वहां नजरबंद हैं।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
SC ने KG-D6 लागत-वसूली विवाद में मध्यस्थों पर HC के फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दाखिल केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। दरअसल, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के केजी-डी6 गैस ब्लॉक में लागत विवाद की जांच के लिए गठित मध्यस्थता पैनल में तीन में से दो न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित केंद्र की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
इस मामले में चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने कहा कि 'क्षमा करें, हम हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं देना चाहेंगे।'
केंद्र ने उच्च न्यायालय के नौ दिसंबर के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।केंद्र सरकार ने कथित पक्षपात के कारण दो न्यायाधीशों को उनके कार्यों से मुक्त करने की घोषणा के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था।