सुप्रीम कोर्ट 20 वर्षीय एक युवती की उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिनमें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उनके कानूनी अभिभावक (आईपीएस अधिकारी) के खिलाफ शुरू की विभागीय जांच के आदेश को चुनौती दी गयी है। वास्तव में आईपीएस अधिकारी पर शादीशुदा होने के बावजूद उस युवती की जैविक मां से विवाह करने का आरोप लगा है।
महिला ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा उसके कानूनी अभिभावक के खिलाफ शुरू की गई यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और यह कार्रवाई उसे और उनकी मृतक जैविक मां को जलालत करने के लिए है।
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी की दलीलों को सुनने के बाद राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। साथ ही पीठ ने विभागीय कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।