याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सौरभ मिश्रा ने चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से इस मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने अप्रैल के पहले सप्ताह में मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। मार्च में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को भारतीय सेना के एक अधिकारी की मां द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें उन्होंने बेटे को पाकिस्तान की सेंट्रल जेल से रिहा करने की मांग की गई थी। 23 वर्षों ने परिवार और अधिकारी के बीच संवाद नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता ने विदेश मंत्रालय के राजनयिक माध्यम से तत्काल मानवीय आधार पर सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सौरभ मिश्रा ने चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से इस मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने अप्रैल के पहले सप्ताह में मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की। मार्च में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया था।
पीठ ने नोटिस जारी करते हुए वकील सौरभ मिश्रा से कहा था कि क्या न्यायालय को एक सूची प्रदान करना संभव हो सकता है क्योंकि उन्हें सूचित किया गया है कि एक से अधिक व्यक्ति हैं जो वहां के जेलों में बंद हैं। याचिकाकर्ता मां ने विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली के राजनयिक चैनल के माध्यम से लाहौर कोट लखपत सेंट्रल जेल, पाकिस्तान से अपने बेटे कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी की स्वदेश वापसी और रिहाई के संबंध में तत्काल और आवश्यक कदम उठाने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की है।
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याचिकाकर्ता के अनुसार, उसका बेटा भारतीय सेना का अधिकारी है और पाकिस्तान की किसी अज्ञात जेल में बंद है, लेकिन सरकार द्वारा उसकी रिहाई के लिए कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई है। लिहाजा यह याचिकाकर्ता के बेटे के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले 23 वर्षों की अवधि में उसके बेटे को उचित अथॉरिटी के समक्ष अपना मामला बताने या अपने परिवार के सदस्यों के साथ संवाद करने की अनुमति नहीं दी गई है।