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Supreme Court: लॉ छात्रों के अटेंडेंस नियमों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, दिल्ली HC के फैसले को दी चुनौती

Wed, 13 May 2026 05:32 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने लॉ छात्रों की अटेंडेंस से जुड़े दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। मामला बीसीआई के नियमों और छात्र हितों से जुड़ा है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लॉ कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति (अटेंडेंस) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमति जताई है।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई शामिल थे, ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि अटेंडेंस को लेकर सख्त रुख नहीं अपनाया गया तो लॉ कॉलेज केवल बोर्डिंग और लॉजिंग जैसी जगह बनकर रह जाएंगे। 

हाईकोर्ट के फैसले पर क्या है विवाद?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 नवंबर के अपने फैसले में कहा था कि किसी भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय को छात्रों को न्यूनतम अटेंडेंस की कमी के कारण परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि अत्यधिक सख्त उपस्थिति नियम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। अदालत ने यह टिप्पणी एक छात्र की आत्महत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की थी।
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मामला छात्र की आत्महत्या से जुड़ा
यह पूरा मामला 2016 में लॉ छात्र सुसांत रोहिल्ला की आत्महत्या से जुड़ा है। आरोप था कि उन्हें कम उपस्थिति के कारण परीक्षा में बैठने से रोका गया था। बाद में उन्होंने अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। हाईकोर्ट ने इस घटना को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालयों में ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी (GRC) बनाने का भी निर्देश दिया था, ताकि छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
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BCI के नियमों पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया था कि वह लॉ कोर्स (3 वर्षीय और 5 वर्षीय LLB) के लिए अनिवार्य अटेंडेंस नियमों पर पुनर्विचार करे। अदालत ने यह भी कहा था कि मूट कोर्ट, सेमिनार, डिबेट और कोर्ट विजिट जैसी गतिविधियों को भी उपस्थिति में शामिल किया जाना चाहिए।

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