मेघालय हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन की टिप्पणी के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट परीक्षण को राजी हो गया है। यह याचिका वकील सोना खान सहित अन्य लोगों ने दायर की है। दरअसल जस्टिस सेन ने एक फैसले में टिप्पणी की थी कि वर्ष 1947 में विभाजन के वक्त भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और मेघालय हाईकोर्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पहले याचिकाकर्ता ने जस्टिस सेन से न्यायिक कार्य छीनने और विवादास्पद टिप्पणी को हटाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका में बदलाव करने को कहा था।
जस्टिस सेन ने फैसले में कहा था, ‘पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर लिया था। चूंकि धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ था लिहाजा भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए था, लेकिन भारत धर्मनिरपेक्ष ही बना रहा।’
जस्टिस सेन ने फैसले में यह लिखा था
फैसले में जज ने लिखा था, ‘यहां तक कि आज भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी आदि को प्रताड़ित किया जाता है। उनके पास कहीं और जाने का विकल्प भी नहीं है। विभाजन के वक्त जो हिंदू भारत में दाखिल हुए थे, उनसे विदेशी की तरह व्यवहार हो रहा है, यह घोर अतार्किक और गैर कानूनी है। साथ ही नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत के भी खिलाफ है।’