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राम जन्मभूमि मामले में 8 फरवरी से सुनवाई शुरू करेगा सुप्रीम कोर्ट, सियासत गरमाने में जुटा संघ परिवार

Sat, 03 Feb 2018 06:34 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आठ फरवरी से सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू होने के साथ ही संघ परिवार इस मुद्दे पर सियासत गरमाने में जुट गया है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि अगले चुनाव में नरेंद्र मोदी सरकार के प्रदर्शन के अलावा तीन तलाक और राम जन्मभूमि मंदिर ही सबसे अहम मुद्दे होंगे।

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विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सूत्रों के अनुसार उन्होंने सुनवाई शुरू होने से पहले ही सारी तैयारी कर ली है। वे नहीं चाहते की कानूनी प्रक्रिया में उनकी वजह से कोई देरी हो। उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तीन जजों की बेंच प्रतिदिन 3 घंटे सुनवाई करेगी। उन्हें आशा है कि 30 दिन की कार्यवाही में सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो जाएगी और 16 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही बेंच फैसला सुरक्षित कर लेगी।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने है। चूंकि जस्टिस मिश्रा अक्तूबर में रिटायर हो रहे हैं, इसलिए विहिप को उम्मीद है कि वह उससे पहले ही केस का फैसला सुना देंगे। बेंच ने आदेश दिया है कि इस केस की सुनवाई हर हफ्ते मंगलवार बुधवार और बृहस्पतिवार को तीन-तीन घंटे के लिए की जाएगी।
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विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय का दावा है कि पिछले 35 सालों से चल रही कार्रवाई में हर बार देरी बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की वजह से ही हो रही है। 

ताजा उदाहरण 5 जनवरी का है जब सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से 2019 के लोकसभा चुनाव होने के बाद सुनवाई किए जाने की अपील की। 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की बेंच द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद यह पहला मौका था जब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू करने जा रही थी। सिब्बल और वरिष्ठ वकील राजीव धवन के हंगामे के बाद बेंच ने सुनवाई 8 फरवरी से शुरू करने का आदेश दिया था।

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समय सीमा के अंदर ही सुनवाई पूरी करेगा SC

प्रतीकात्मक तस्वीर
हाई कोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था, जिसमें से गर्भ गृह की जमीन रामलला विराजमान को दी गई थी और दो अन्य हिस्से निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिए गए थे। 

तीनों पक्षों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि हाईकोर्ट से किसी ने भी विवादित जमीन का बंटवारा करने की प्रार्थना नहीं की थी। इसलिए उसका यह फैसला कानून सम्मत नहीं है।

हाईकोर्ट के 3 जजों की बेंच के सामने भी यह मामला लगभग 15 साल तक लंबित था। इस दौरान 14 जज बदल गए। लेकिन उन्होंने यह गनीमत की कि हर बार मामले की सुनवाई नए सिरे से शुरू नहीं की। दो पुराने जज के सहारे सुनवाई चलती रही। इसमें तेजी जस्टिस एस यू खान के शामिल होने के बाद आई। 

उन्होंने सभी पक्षों के लिए एक समय सीमा निर्धारित कर दी जिसमें वे अपनी बहस पूरी कर सकते थे। इसी वजह से यह बेंच अपना फैसला दे सकी। चंपत राय का मानना है सुप्रीम कोर्ट भी मामले को ज्यादा लंबा न खींच कर एक समय सीमा के अंदर ही इसकी सुनवाई पूरी करेगी।

हाईकोर्ट के फैसले में जो जमीन राम मंदिर बनाने के लिए दी गई है वह महज 1400 स्क्वायर फीट है। जबकि विश्व हिंदू परिषद ने जिस भव्य मंदिर के निर्माण की तैयारी की है सिर्फ उसकी इमारत के लिए ही 36500 वर्ग फीट जमीन की जरूरत होगी। इसके अलावा परिक्रमा मार्ग और दर्शनार्थियों की सुविधाओं के लिए कम से कम इतनी ही जमीन और जरूरत होगी।

विश्व हिंदू परिषद ने हर व्यक्ति से सवा रुपये चंदा लेकर छह करोड़ लोगों से सवा आठ करोड़ रुपये जुटाये थे। उनसे मंदिर के लिए जरूरी पत्थरों में से साठ प्रतिशत पत्थर नक्काशी करके तैयार किए जा चुके हैं। हद परिषद के पास पैसे खत्म हो चुके हैं। चंपत राय का कहना था की 8 फरवरी से वह देश भर में मंदिर के लिए चंदा जुटाने का अभियान छेड़ेंगे जिससे शेष बचे हुए पत्थर भी जुटाई जा सके और निर्माण सामग्री खरीदी जा सके।
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