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एससी-एसटी कानून में बदलाव का परीक्षण करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र से छह हफ्ते में मांगा जवाब

Sat, 08 Sep 2018 06:48 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन कानून, 2018 का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। इस संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।  

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जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर केंद्र से छह हफ्ते में जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने दूसरे पक्ष को सुने बिना संशोधित कानून पर रोक लगाने की मांग ठुकरा दी। एक याची की ओर से पेश मोहन परासरन ने कहा कि सरकार ने संशोधन के जरिये 20 मार्च को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया है। संशोधित कानून के जरिये पहले जैसी स्थिति बहाल कर दी गई। 

याचिका में गुहार लगाई गई है कि संशोधित कानून को निरस्त कर 20 मार्च के आदेश को बहाल किया जाए। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के दुरुपयोग के मद्देनजर अधिनियम के तहत मिलने वाली शिकायत पर स्वत: एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही अग्रिम जमानत का प्रावधान जोड़ दिया था। एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की बात कही थी। कोर्ट ने कहा था कि सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तार से पहले नियुक्त करने वाली अथॉरिटी से अनुमति लेनी होगी। पृथ्वी राज चौहान, प्रिया शर्मा और एक संस्था ने संशोधन कानून को चुनौती दी है। 
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केंद्र की पुनर्विचार याचिका है लंबित
आदेश के खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जो फिलहाल लंबित है। इसी दौरान सरकार ने कानून में संशोधन कर दिया। इससे दलितों को सताने की शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी होगी। आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल पाएगी। एफआईआर दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच की जरूरत नहीं होगी।
 

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जातिवाद की घिनौनी राजनीति कर रही है भाजपा : मायावती

संशोधन कानून के खिलाफ 6 सितंबर को भारत बंद पर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि यह भाजपा और संघ का चुनावी षड्यंत्र है। भाजपा शासित राज्यों में सबसे ज्यादा विरोध साबित करता है कि पार्टी जातिवाद की घिनौनी राजनीति कर रही है। भाजपा ऐसे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रही है, ताकि असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। 

अगड़ी जातियों को बदलनी चाहिए मानसिकता : अठावले
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि अगड़ी जाति के लोग कानून में बदलाव की मांग के बजाय दलितों के प्रति मानसिकता में बदलाव करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। बृहस्पतिवार को भाजपा शासित राज्यों में हुए ‘भारत बंद’ को अठावले ने विपक्षी दलों की सरकार को बदनाम करने की कोशिश करार दिया।
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