सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी फंड का दुरुपयोग करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर लगाम लगाने को लेकर केंद्र सरकार से कानून बनाने पर विचार करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से आठ हफ्ते में इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। देशभर में करीब 30 लाख एनजीओ हैं, जिनमें से 24 लाख आय-व्यय का ब्योरा नहीं देते हैं।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मौजूदा प्रावधान कारगर नहीं हैं, लिहाजा इसके लिए कानून की जरूरत है। पीठ ने कहा कि एनजीओ को मिलने वाले सरकारी फंड का लेखा-जोखा तो होना ही चाहिए। यह जनता का पैसा है और इसे यूं ही किसे को नहीं दिया जा सकता। इसका ऑडिट तो जरूरी है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि इस संबंध में दिशानिर्देश का खाका तैयार कर लिया गया है। गत 13 अप्रैल को इसकी जानकारी 76 मंत्रालय और विभागों को दी गई है। सरकार ने बताया कि एनजीओ और स्वयंसेवी संस्थाओं को 76 मंत्रालय और विभागों द्वारा फंड दिया जाता है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली सरकारी एजेंसी ‘कपार्ट’ ने पीठ को बताया कि उसकी तरफ से 718 एनजीओ को ब्लैक लिस्ट किया गया है।
हालांकि इनमें से 15 को उनके जवाब से संतुष्ट होने के बाद ब्लैक लिस्ट से हटा दिया गया है। कपार्ट ने 159 एनजीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की है। वर्ष 2015 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर में करीब 30 लाख एनजीओ हैं और इनमें से करीब 24 लाख एनजीओ आमदनी और खर्च का ब्योरा नहीं देते हैं।