सुप्रीम कोर्ट ने अधूरी आवास परियोजनाओं से परेशान मध्यम वर्गीय करदाताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार एक पुनरुद्धार निधि बनाए, जिससे संकटग्रस्त प्रोजेक्ट्स को अस्थायी फंडिंग मिले और खरीदारों के हित सुरक्षित रहें। इसके साथ ही कोर्ट ने आरईआरए को प्रभावशाली बनाने के लिए छह माह में एसओपी तैयार करने का भी आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने करदाताओं और मध्यम वर्गीय घर खरीदारों को लेकर केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए है। कोर्ट ने घर खरीदारों की स्थिति को देखते हुए सरकार से कहा है कि वह अधूरे पड़े आवास परियोजनाएं को पूरा करने के लिए एक पुनरुद्धार फंड की स्थापना पर विचार करे। बता दें कि यह फंड ऐसे परियोजनाओं को अस्थायी वित्तीय सहायता देगा जो संकट में चल रहे हैं, ताकि घर खरीदारों के हितों की रक्षा हो सके।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह तीन महीने के भीतर यह रिपोर्ट दाखिल करे कि इन निर्देशों के पालन में क्या-क्या कदम उठाए गए। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि हर नया हाउसिंग प्रोजेक्ट, जिसमें 20% से अधिक भुगतान हो चुका हो, उसे स्थानीय राजस्व विभाग में रजिस्टर करना अनिवार्य होगा।
एस्क्रो अकाउंट सिस्टम लागू करने पर जोर
इसके साथ ही कोर्ट ने इस दौरान एस्क्रो अकाउंट सिस्टम लागू करने पर जोर दिया गया ताकि खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहे और उसका सही उपयोग हो। अंत में, कोर्ट ने कहा कि घर सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। भारत का शहरी भविष्य इन ईमानदार घर खरीदारों पर टिका है।
पूर्ण भुगतान के बाद भी घर न मिलने का होता है गंभीर असर
घर खरीदारों के हितों की रक्षा से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में पूर्ण या पर्याप्त भुगतान के बावजूद निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है। अदालत ने कहा, बड़ी रकम चुकाने के बावजूद घर न मिलने की चिंता स्वास्थ्य, उत्पादकता और सम्मान पर गंभीर असर डालती है।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार एनएआरसीएल के तहत एक पुनरुद्धार कोष स्थापित करने या एसडब्ल्यूएएमआईएच (सस्ती और मध्य आय आवास के लिए विशेष खिड़की) कोष का विस्तार करने पर विचार करे ताकि सीआईआरपी (कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया) से गुजर रही संकटग्रस्त परियोजनाओं के लिए ब्रिज फाइनेंसिंग प्रदान की जा सके, जिससे व्यवहार्य परियोजनाओं के परिसमापन को रोका जा सके और खरीदारों के हितों की रक्षा की जा सके।
20 फीसदी भुगतान पर पंजीकृत किया जाए
पीठ ने कहा कि नई आवासीय परियोजनाओं के लिए प्रत्येक आवासीय अचल संपत्ति लेनदेन को क्रेता/आवंटी द्वारा संपत्ति की लागत का कम से कम 20 प्रतिशत भुगतान करने पर स्थानीय राजस्व प्राधिकारियों के पास पंजीकृत किया जाएगा। पीठ ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं जो अभी प्रारंभिक चरण में हैं, जैसे जहां भूमि का अधिग्रहण किया जाना है या निर्माण शुरू नहीं हुआ है, वहां आवंटियों से प्राप्त राशि को एस्क्रो खाते में रखा जाएगा और रेरा की ओर से अनुमोदित एसओपी के अनुसार परियोजना की प्रगति के अनुरूप चरणों में वितरित किया जाएगा। प्रत्येक रेरा को छह महीने के अंदर ऐसे एसओपी तैयार करने होंगे।
तीन महीने के अंदर दी जाए अनुपालन रिपोर्ट
पीठ ने केंद्र से कहा कि वह देश भर में एनसीएलटी/एनसीएलएटी के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए उठाए गए कदमों पर तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे। पीठ ने कहा कि अदालत कक्षों और सदस्यों के कक्षों में पानी के रिसाव के कारण चंडीगढ़ एनसीएलटी और दिल्ली एनसीएलटी के कुछ हिस्सों को हाल ही में बंद किया जाना मजबूत बुनियादी ढांचे की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। पीठ ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि रेरा प्राधिकरणों में पर्याप्त संख्या में बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ और संसाधन उपलब्ध हों।
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सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में बने समिति
पीठ ने कहा कि तीन महीने के भीतर, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की जानी चाहिए। इसमें विधि, आवास मंत्रालय के प्रतिनिधि, रियल एस्टेट और वित्त के क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा अन्य लोग शामिल हों, जो रियल एस्टेट क्षेत्र में सफाई और विश्वसनीयता लाने के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रणालीगत सुधारों का सुझाव दें।