पर्यावरण मुआवजे पर एक समान दिशा-निर्देश बनाए केंद्र: सुप्रीम कोर्ट
देश में कचरा फैलाने और प्रदूषण बढ़ाने वालों पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के तहत प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों पर पर्यावरण मुआवजा लगाने और वसूलने के लिए एकसमान और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करे। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इस संबंध में प्रगति रिपोर्ट पेश करने और हलफनामा दाखिल करने को कहा है। पीठ ने अमरावती नगर निगम से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह साफ किया कि पर्यावरण मुआवजा केवल कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं है, बल्कि यह प्रकृति को पहुंचाए गए नुकसान की भरपाई के लिए लिया जाने वाला शुल्क है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि मुआवजा तय करने का नियम मनमाना नहीं हो सकता। यह इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि प्रदूषण से पर्यावरण को कितना वास्तविक नुकसान पहुंचा है। मुआवजा तब तक वसूला जाना चाहिए जब तक कि पर्यावरण को पहुंचा नुकसान पूरी तरह ठीक न हो जाए।