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टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट- दिल्ली, चंडीगढ़ से नजदीक है सिर्फ इसलिए सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं किया जा सकता

Sat, 27 Nov 2021 11:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने न्यायिक समय की बर्बादी के कारण याचिकाकर्ता पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया। पीठ ने याचिकाकर्ता को जुर्माने की रकम चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट ग्रुप सी कर्मचारी कल्याण संघ में जमा करने का निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित एक स्थगन आदेश को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका(एसएलपी) को खारिज करते हुए कहा है कि दिल्ली, चंडीगढ़ से नजदीक है इसका मतलब यह नहीं है कि हर हमेशा सर्वोच्च न्यायालय पहुंच जाएं। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी किया है।

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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा, 'तथ्य यह है कि अदालत ने केवल याचिकाकर्ता के वकील को स्थगन के अनुरोध को स्वीकार किया। फिर भी याचिकाकर्ता द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद-136 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके आदेश को दोषपूर्ण करार देने की मांग की गई है। यदि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं तो और क्या है? शीर्ष न्यायालय का रुख केवल इसलिए नहीं किया जाना चाहिए कि चंडीगढ़, दिल्ली के निकट है।'

पीठ ने न्यायिक समय की बर्बादी के कारण याचिकाकर्ता पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया। पीठ ने याचिकाकर्ता को जुर्माने की रकम चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट ग्रुप सी कर्मचारी कल्याण संघ में जमा करने का निर्देश दिया है। आदेश में पीठ ने यह भी कहा कि एसएलपी, इस तथ्य को लेकर दायर नहीं की गई थी कि आदेश गलत तरीके से दर्ज किया गया था बल्कि केवल इसलिए कि हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को नोटिस जारी किए बिना मामले को तीन महीने के लिए स्थगित कर गलती की है।

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