पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर देशव्यापी शोक के चलते अधर में लटके छात्रों के भविष्य को सुप्रीम कोर्ट ने राह दिखाई है। दरअसल, शोक के दौरान डाक पहुंचने में देरी के कारण 208 छात्र जज की परीक्षा में बैठने से महरूम रह गए थे। सर्वोच्च अदालत ने इन अभ्यर्थियों को अस्थायी रूप से परीक्षा में बैठने की इजाजत दी है। साथ ही डाक विभाग को बेवजह देरी का कारण बताने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने इन 208 अभ्यर्थियों को मध्य प्रदेश में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की भर्ती के लिए होने वाली मुख्य परीक्षा में अस्थायी रूप से बैठने की इजाजत दे दी है। वास्तव में मुख्य परीक्षा के आवेदन की आखिरी तारीख 25 अगस्त थी। यह आवेदन जबलपुर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री तक पहुंचने थे। इन अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने 21 अगस्त को या उससे पहले स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड डाक से आवेदन भेजा था लेकिन उनका आवेदन 25 अगस्त तक हाईकोर्ट रजिस्ट्री को नहीं मिला। जिस कारण उन्हें मुख्य परीक्षा में उन्हें बैठने से वंचित किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के बाद सात दिनों के शोक को डाक देरी से पहुंचने का एक कारण बताया गया है। मालूम हो कि गत 16 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का निधन हुआ था।
अभ्यर्थियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ ने कहा कि आवेदन पहुंचने में देरी डाक विभाग के कारण हुई है ऐसे में अभ्यर्थियों का इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। पीठ ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए सभी 208 अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार केपास जाकर डाक भेजने का प्रमाण पेश कर एडमिट कार्ड प्राप्त करने के लिए कहा है। हालांकि पीठ ने साफ किया है कि परीक्षा में बैठने की अनुमति देना अंतरिम व्यवस्था है। याचिका के अंतिम निर्णय पर उनका भविष्य निर्भर होगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पोस्ट मास्टर जनरल को जांच कर यह पता लगाने के लिए कहा है कि देरी से डाक पहुंचने की वजह क्या थी। पोस्ट मास्टर जनरल को एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है।