फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल; सुपर CJI जैसा व्यवहार बताया, जांच के आदेश

Mon, 04 May 2026 01:39 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे नैस्टी बताया और प्रशासनिक चूक की जांच के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने उसके आदेश की गलत व्याख्या की और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी नहीं किया।

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने ही रजिस्ट्री तंत्र के कामकाज पर तीखी नाराजगी जताते हुए उसे नैस्टी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि कुछ अधिकारी खुद को सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समझने लगे हैं। अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक चूक की जांच के भी निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ यह टिप्पणी उस समय कर रही थी, जब वह आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आयुषी मित्तल और उनके पति पर 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित निवेश घोटाले में शामिल होने का आरोप है।

रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने 23 मार्च के अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि रजिस्ट्री ने कैसे निष्कर्ष निकाल लिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी नहीं किया गया।

सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि रजिस्ट्री बहुत खराब तरीके से काम कर रही है। यहां बैठे लोग खुद को सुपर सीजेआई समझते हैं। अदालत ने अपने ताजा आदेश में स्पष्ट किया कि 23 मार्च के आदेश का आशय ED को पक्षकार बनाकर नोटिस जारी करना था। पीठ ने निर्देश दिया कि ED को तुरंत नोटिस भेजा जाए।

जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री में हुई इस चूक को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को तथ्यात्मक जांच करने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि अदालत के आदेश की गलत व्याख्या कैसे हुई और नोटिस जारी क्यों नहीं किया गया।

घोटाले का मामला और जमानत याचिका

मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा पैसा वापस कर दिया गया है, हालांकि सैकड़ों करोड़ रुपये अभी भी बैंक खातों में फ्रीज हैं, जिन्हें ईडी ने जब्त कर रखा है।

संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक याचिकाकर्ता और उसके परिवार की सभी चल और अचल संपत्तियों का समग्र विवरण नहीं दिया जाता, तब तक जमानत याचिका पर मेरिट के आधार पर विचार नहीं किया जाएगा।

विज्ञापन


पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का कानूनी प्रतिनिधि एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें याचिकाकर्ता, उसके पति, बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और ससुराल पक्ष की संपत्तियों का पूरा विवरण हो। इसके अलावा कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्तियों की जानकारी भी देने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि संपत्तियों का पूरा ब्योरा मिलने के बाद ही जमानत पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई मई में सूचीबद्ध की गई है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें