सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे नैस्टी बताया और प्रशासनिक चूक की जांच के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने उसके आदेश की गलत व्याख्या की और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने ही रजिस्ट्री तंत्र के कामकाज पर तीखी नाराजगी जताते हुए उसे नैस्टी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि कुछ अधिकारी खुद को सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समझने लगे हैं। अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक चूक की जांच के भी निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने 23 मार्च के अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि रजिस्ट्री ने कैसे निष्कर्ष निकाल लिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी नहीं किया गया।
सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि रजिस्ट्री बहुत खराब तरीके से काम कर रही है। यहां बैठे लोग खुद को सुपर सीजेआई समझते हैं। अदालत ने अपने ताजा आदेश में स्पष्ट किया कि 23 मार्च के आदेश का आशय ED को पक्षकार बनाकर नोटिस जारी करना था। पीठ ने निर्देश दिया कि ED को तुरंत नोटिस भेजा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री में हुई इस चूक को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को तथ्यात्मक जांच करने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि अदालत के आदेश की गलत व्याख्या कैसे हुई और नोटिस जारी क्यों नहीं किया गया।
मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा पैसा वापस कर दिया गया है, हालांकि सैकड़ों करोड़ रुपये अभी भी बैंक खातों में फ्रीज हैं, जिन्हें ईडी ने जब्त कर रखा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक याचिकाकर्ता और उसके परिवार की सभी चल और अचल संपत्तियों का समग्र विवरण नहीं दिया जाता, तब तक जमानत याचिका पर मेरिट के आधार पर विचार नहीं किया जाएगा।